नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण रेलवे पुल नंबर-दो और मदन महल रेल अंडरब्रिज लंबे समय से विभागीय लापरवाही और रेलवे-नगर निगम के बीच समन्वय के अभाव का शिकार बने हुए हैं। एक ओर वर्ष 2018 में शुरू हुआ रेलवे पुल नंबर-दो का चौड़ीकरण आज तक पूरा नहीं हो सका, वहीं दूसरी ओर मदन महल रेल अंडरब्रिज में हर बारिश के दौरान जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है। इसका सीधा असर रोजाना इन मार्गों से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों और स्थानीय लोगों पर पड़ रहा है।
छह साल बाद भी अधूरा है पुल नंबर-दो का विस्तार
शहर की बढ़ती यातायात जरूरतों को देखते हुए वर्ष 2018 में रेलवे के तीन प्रमुख अंडरब्रिजों के चौड़ीकरण की योजना तैयार की गई थी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब आठ करोड़ रुपये रखी गई थी। रेलवे की मांग पर नगर निगम ने लगभग पांच करोड़ रुपये जमा भी करा दिए।
हालांकि इस योजना के तहत केवल रेलवे पुल नंबर-चार का चौड़ीकरण ही पूरा हो सका। सबसे व्यस्त रेलवे पुल नंबर-दो पर निर्माण कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन कुछ समय बाद अचानक रोक दिया गया। पुल के समानांतर नया हिस्सा तैयार करने के लिए खुदाई की गई और कंक्रीट ब्लॉक भी बनाए गए थे, लेकिन काम बंद होने के बाद खुदाई वाले हिस्से को फिर से भर दिया गया। निर्माण सामग्री आज भी मौके पर पड़ी हुई है और कंक्रीट ब्लॉकों के आसपास घास उग चुकी है, जो लंबे समय से बंद पड़े काम की गवाही दे रही है।
शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है पुल नंबर-दो
रेलवे पुल नंबर-दो शहर के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। यह कलेक्ट्रेट, एम्पायर टॉकीज, हाईकोर्ट, मंडला रोड और मुख्य रेलवे स्टेशन तक पहुंचने का अहम रास्ता है। प्रतिदिन हजारों छोटे और बड़े वाहन इस पुल से गुजरते हैं।
पुल की चौड़ाई कम होने के कारण यहां सुबह और शाम के समय लंबा जाम लगना आम बात हो गई है। कई बार ऊंचे वाहन हाइट गेज से टकरा जाते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। रात के समय भारी वाहन फंसने पर घंटों तक यातायात प्रभावित रहता है और लोगों को वैकल्पिक मार्गों से लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है।
मदन महल अंडरब्रिज में हर बारिश के साथ लौटती है जलभराव की समस्या
मदन महल रेल अंडरब्रिज की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। बारिश शुरू होते ही यहां पानी भर जाता है और आवागमन पूरी तरह बंद करना पड़ता है। इस वर्ष पहली ही बारिश में एक कार अंडरब्रिज में फंस गई थी। इसके बाद दुर्घटनाओं से बचाव के लिए प्रशासन ने अंडरब्रिज के मुहाने पर बैरियर लगा दिया।
इसके बावजूद स्थायी जल निकासी की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। उल्लेखनीय है कि कटनी में इसी तरह की समस्या का समाधान पंप लगाकर किया जा चुका है, लेकिन जबलपुर में अब तक ऐसा कोई स्थायी इंतजाम नहीं किया गया है।
बढ़ी निर्माण लागत और बकाया भुगतान बना विवाद की वजह
नगर निगम से राशि मिलने के बाद रेलवे ने पुल नंबर-दो के विस्तार का कार्य शुरू किया था, लेकिन निर्माण की धीमी गति और बाद में कोरोना काल के कारण परियोजना की लागत बढ़ गई। रेलवे के अनुसार कार्य पूरा करने के लिए करीब दो करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है। अतिरिक्त राशि की मांग करते हुए रेलवे ने निर्माण कार्य रोक दिया।
दूसरी ओर नगर निगम का कहना है कि रेलवे पर सफाई और संपत्ति कर के लगभग साढ़े 12 करोड़ रुपये बकाया हैं। निगम ने इस राशि के भुगतान की मांग की है। दोनों विभागों के बीच इसी वित्तीय विवाद के चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है और इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था के लिए अहम हैं ये रेल अंडरब्रिज
जबलपुर में रेलवे के पांच प्रमुख रेल अंडरब्रिज शहर की यातायात व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। पुल नंबर-एक यानी सतपुला अंडरब्रिज सिविल लाइंस और इंदिरा मार्केट को जोड़ता है, जहां पर्याप्त चौड़ाई होने से जाम की समस्या नहीं रहती। पुल नंबर-दो हाईकोर्ट चौक, एम्पायर और मंडला रोड को जोड़ता है और सबसे अधिक यातायात दबाव झेलता है।
पुल नंबर-तीन सदर और नागरथ चौक को जोड़ता है, जहां अपेक्षाकृत कम यातायात रहता है। पुल नंबर-चार के चौड़ीकरण के बाद कटंगा, गोरखपुर और रसल चौक क्षेत्र में जाम की समस्या काफी हद तक समाप्त हो चुकी है। वहीं पुल नंबर-पांच यानी मदन महल रेल अंडरब्रिज मूल रूप से जल निकासी के लिए बनाया गया था, लेकिन बड़ी आबादी इसे दैनिक आवागमन के मार्ग के रूप में इस्तेमाल करती है। बारिश के दौरान जलभराव होने से यह मार्ग पूरी तरह बंद हो जाता है।
