एक नया आवेदन प्रस्तुत कर आयोग से हादसे में डूबे क्रूज के इंजन और उसके शेष बचे हिस्सों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की गई। …और पढ़ें

HighLights
- 14 मौतों वाले बरगी क्रूज हादसे में स्वतंत्र विशेषज्ञ जांच की मांग
- कहा- विमान और रेल दुर्घटनाओं की तरह हो तकनीकी पड़ताल
- वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष अधिक उचित होगा
सुरेन्द्र दुबे, नईदुनिया, जबलपुर। नर्मदा के बरगी बांध में 30 अप्रैल को हुए भीषण क्रूज हादसे की जांच अब एक नए और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। हादसे में 14 लोगों की मौत के कारणों की पड़ताल कर रहे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता वाले उच्च न्यायिक जांच आयोग के समक्ष जबलपुर के सामाजिक कार्यकर्ता अखिलेश त्रिपाठी ने अपने अधिवक्ता पंकज दुबे के साथ विस्तृत बयान दर्ज कराए।
मुख्य सवाल : तकनीकी जांच क्यों नहीं हुई?
आवेदन में एक ऐसा सवाल उठाया गया है जो अब तक जांच के केंद्र में नहीं दिखा था-आखिर जिस जलयान में 14 लोगों की जान गई, उसकी तकनीकी स्थिति की निष्पक्ष पड़ताल क्यों नहीं हुई? आवेदन में कहा गया है कि किसी भी गंभीर दुर्घटना के बाद वाहन या यान की तकनीकी जांच प्राथमिक आवश्यकता मानी जाती है।
विमान, रेल और समुद्री हादसों का हवाला
याचिका में कहा गया है कि दुनिया भर में विमान दुर्घटनाओं, रेल हादसों और समुद्री दुर्घटनाओं के बाद संबंधित वाहन या पोत की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाती है। दुर्घटना के कारणों, यांत्रिक खामियों और संचालन संबंधी पहलुओं का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है। बरगी हादसे में अब तक ऐसी कोई स्वतंत्र तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
क्रूज खोला गया, इंजन भी अलग कर दिया गया
आवेदन में यह तथ्य भी सामने रखा गया है कि हादसे के बाद क्रूज को खोल दिया गया और उसका इंजन तक अलग कर दिया गया। ऐसे में दुर्घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारियों के निर्धारण के लिए शेष बचे हिस्सों, इंजन तथा घटनास्थल का विशेषज्ञ परीक्षण आवश्यक हो गया है।
बयानों से आगे वैज्ञानिक साक्ष्य की मांग
याचिकाकर्ता ने आयोग के समक्ष तर्क रखा कि हादसे को लेकर अलग-अलग पक्षों से भिन्न-भिन्न दावे और व्याख्याएं सामने आ रही हैं। ऐसी स्थिति में केवल मौखिक बयानों पर निर्भर रहने के बजाय तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालना अधिक उचित होगा।
आवेदन में आयोग को यह सुझाव भी दिया गया है कि वह किसी स्वतंत्र और विशेषज्ञ एजेंसी की सेवाएं ले। एक समुद्री तकनीकी परामर्श संस्था का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि आयोग अपने विवेक से किसी भी उपयुक्त राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ संस्था से रिपोर्ट मंगा सकता है।
अधिवक्ता पंकज दुबे, जनहित याचिकाकर्ता अखिलेश त्रिपाठी के वकील
- क्रूज में विमानों की तरह कोई ब्लैक बाक्स नहीं होता, लेकिन विशेषज्ञ जांच के जरिए इंजन, यांत्रिक संरचना, सुरक्षा उपकरणों और संचालन तंत्र की पड़ताल की जा सकती है। इसीलिए आवेदन का मूल आग्रह यही है कि दुर्घटना के तकनीकी पहलुओं को भी उतनी ही गंभीरता से परखा जाए, जितनी गंभीरता से गवाहों और अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। ब्लैक बाक्स जैसी चीज भले न मिले पर ठोस जांच पड़ताल से हादसे के वास्तविक कारणों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
न्यायमूर्ति संजय संजय द्विवेदी, चेयरमैन, न्यायिक जांच आयोग, बरगी डेम क्रूज हादसा
