इन अंडों को 40 दिन तक रेत में ही रहने दिया जाता है। उसके बाद 200 अंडों को सहेजकर देवरी सेंटर लाया जाता है। यहां 20 दिन तक हेचिंग के लिए 30 से 35 डिग्र …और पढ़ें

HighLights
- पांच दिन में 99 अंडों से निकले घड़ियाल शावक।
- ढाई से तीन साल देवरी सेंटर में रख पाला जाएगा।
- उधर अस्थायी हेचरी में 18 कछुओं ने भी जन्म लिया।
नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। मई का महीना घड़ियाल और कछुओं की वंशवृद्धि का होता है। इस महीने अंडों से कछुए और घड़ियाल निकलते है। देवरी घड़ियाल सेंटर में हेचिंग के लिए रखे गए अंडों से बुधवार को 29 नन्हें घड़ियालों ने जन्म लिया। बीते पांच दिन में अंडों से 99 घड़ियाल जन्म ले चुके हैं। इन्हें ढाई से तीन साल इंसानी देखरेख में पाला जाएगा। उधर अस्थायी हेचरी में 18 कछुओं ने भी जन्म लिया।
गौरतलब है, कि घड़ियालों के संरक्षण के लिए देवरी घड़ियाल सेंटर पर हेचिंग के जरिए अंडों से घड़ियाल शावकों का जन्म करवाया जाता है। इसके लिए हर साल चंबल नदी के घाटों से घड़ियालों के 200 अंडों को देवरी सेंटर में लाया जाता है। मार्च-अप्रैल महीने में मादा घड़ियाल नदी किनारे रेतीले टापुओं में अंडे देती हैं।
इन अंडों को 40 दिन तक रेत में ही रहने दिया जाता है। उसके बाद 200 अंडों को सहेजकर देवरी सेंटर लाया जाता है। यहां 20 दिन तक हेचिंग के लिए 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान में अंडों को रखा जाता है।
मई महीने के अंतिम सप्ताह से इन अंडों से बच्चों का जन्म होने लगता है। 23 मई को 70 अंडों से बच्चे निकले। इसके बाद बुधवार को 29 अंडों से बच्चे निकले हैं। 200 अंडों में से 99 की हेचिंग हो चुकी है।
कुछ अंडे खराब हो गए। अभी 99 अंडे और हेचिंग के लिए रखे हैं, जिनसें जून महीने के पहले सप्ताह तक घड़ियाल शावकों का जन्म होगा।
चंबल घड़ियाल अभयारण्य के एसडीओ और देवरी घड़ियाल सेंटर के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया कि देवरी सेंटर में बने कुंडों में ढाई से तीन साल तक पलेंगे, जब इनकी लंबाई 120 सेंटीमीटर हो जाएगी तब चंबल नदी में छोड़ दिया जाएगा।
