नईदुनिया न्यूज, श्योपुर। जिले के 141 गांवों की 9 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने वाला आवदा डैम जिम्मेदार विभाग की अनदेखी और लंबे समय से रखरखाव नहीं होने के कारण बदहाल होता जा रहा है।
शनिवार को डैम के ओवरफ्लो होने के बाद इसकी जर्जर स्थिति और गंभीर हो गई। डैम की दीवारों में पहले से मौजूद दरारों के बीच से पानी बहने लगा, जिससे डैम की मजबूती को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। डैम की दीवार में कई स्थानों पर दो से तीन इंच तक चौड़ी और करीब 15 से 25 फीट लंबी दरारें दिखाई दे रही हैं।
मरम्मत के इंतजार में बांध
ओवरफ्लो होने के बाद इन दरारों से पानी का रिसाव शुरू होने पर स्थिति साफ तौर पर सामने आ गई। डैम की पिचिंग में लगाए गए बड़े पत्थर भी कई स्थानों से उखड़ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद समय रहते मरम्मत और रखरखाव के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए।
85 वर्षों से कर रहा सिंचित
आवदा डैम का निर्माण वर्ष 1927 में शुरू हुआ था और सात वर्ष बाद वर्ष 1934 में यह बनकर तैयार हुआ। करीब 85 वर्षों से यह डैम क्षेत्र की कृषि व्यवस्था का प्रमुख आधार बना हुआ है। डैम से 141 गांवों के किसानों को रबी फसल की सिंचाई के लिए तीन बार पानी उपलब्ध कराया जाता है। इससे 9 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि सिंचित होती है।
