नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों और वारंटियों की तलाश के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इंटर आपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के माध्यम से ऐसे आरोपितों के नए ठिकानों का पता लगाया जा रहा है, जो वर्षों पहले पता बदलकर गिरफ्तारी से बचते आ रहे थे।
ट्रेनों और रेलवे परिसरों में देते थे अंजाम
डिजिटल तकनीक के उपयोग से आरपीएफ को पुराने मामलों में बड़ी सफलता मिलने लगी है। ट्रेनों और रेलवे परिसरों में चोरी, लूट और अन्य अपराधों में शामिल कई आरोपित लंबे समय से फरार थे। इनकी गिरफ्तारी में सबसे बड़ी बाधा उनका बार-बार पता और ठिकाना बदलना था।
पुराने और नए रिकार्ड आसानी से सामने आ रहे हैं
अब आईसीजेएस के जरिए इन अपराधियों की डिजिटल कुंडली तैयार की जा रही है, जिससे उनके पुराने और नए रिकार्ड आसानी से सामने आ रहे हैं। चार माह में आईसीजेएस सिस्टम की सहायता से 11 वारंटियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इनमें कई ऐसे आरोपित शामिल हैं जो 10 से 15 वर्षों से फरार चल रहे थे।
डिजिटल प्लेटफार्म है, जिसमें अपराधियों का विवरण रहता है
आईसीजेएस आरपीएफ का डिजिटल प्लेटफार्म है, जिसमें अपराधियों का विवरण रहता है। इस आनलाइन सिस्टम से पुलिस थाने, जेल और अन्य सुरक्षा एजेंसियां आपस में जुड़ी हुई हैं।
जबलपुर आरपीएफ पोस्ट में…
- 83 लंबित वारंटी दर्ज थे।
- 24 वारंट तामिल किए गए।
- 11 वारंटी गिरफ्तार हुए है।
नोट: गत चार माह की कार्यवाही के आंकड़े।
ऐसे काम करता है नया सिस्टम…
किसी भी आरोपित के कहीं भी गिरफ्तार होने, जेल जाने और उसके खिलाफ दर्ज अपराध की जानकारी इस सिस्टम में आनलाइन दर्ज होती है। जिसे देश के किसी भी हिस्से से सुरक्षा एजेंसी किसी भी अपराधियों की कुंडली डिजिटल रिकार्ड से देख सकती है।
कई बार आरोपित गंभीर जानकारी छिपा लेते थे
आरोपित का नाम सर्च करते ही उसका पुराना आपराधिक रिकार्ड, दर्ज मामला और संबंधित जानकारियां सामने आ जाती हैं। इससे पहले पुलिस आरोपित द्वारा पूछताछ में दी जाने वाली जानकारी पर ही प्रारंभिक रूप से आश्रित रहती थी। इसमें कई बार आरोपित गंभीर जानकारी छिपा लेते थे।
आसपास के पोस्ट भी इससे जुड़ी
आरपीएफ की जबलपुर पोस्ट में जनवरी के अंत से आईसीजेएस सिस्टम का संचालन शुरू किया गया। तकनीक आधारित इस पहल से रेलवे सुरक्षा बल को वर्षों से लंबित मामलों के निराकरण में नई गति मिली।
डिजीटल कुंडली से खुली थी अंतरराज्जीय चोर की पोल
आरपीएफ ने अप्रैल माह में जबलपुर-कटनी के बीच यात्री का सामान चुराकर भाग रहे आरोपित उत्तर प्रदेश के बिजनौर निवासी हरविंदर सिंह उर्फ सन्नी काे पकड़ा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए चलती चलती ट्रेन में सिहोरा के पास एक तालाब में कूद गया था। उसे तालाब से बाहर निकालकर पूछताछ की गई तो गुमराह कर रहा था। डिजीटल रिकार्ड जांच पर पता चला कि वह देश भर में चार सौ से ज्यादा चोरियों को अंजाम देने वाला शातिर अंतरराज्यीय चोर है।
महाराष्ट्र के जलगांव जिले के निवासी आरोपित जगत को दबोचा
कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के जलगांव जिले के निवासी आरोपित जगत को दबोचा। वह 12 वर्षों से गिरफ्तारी से बचता आ रहा था। बंजारा समुदाय से होने के कारण लगातार ठिकाना बदलकर चकमा दे रहा था, लेकिन डिजीटल सिस्टम से उसके महाराष्ट्र में जंगल में बनाए नए ठिकाने तक जबलपुर आरपीएफ पहुंच गई और गिरफ्तार कर लिया।
अपराधियों का डिजिटल रिकार्ड उपलब्ध हो रहा है
आईसीजेएस सिस्टम के माध्यम से अपराधियों का डिजिटल रिकार्ड उपलब्ध हो रहा है। इससे वारंटियों तक पहुंचना आसान हुआ है, जिनकी कई वर्षों से तलाश थी। डिजीटल जानकारी से कई फरार वारंटियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अन्य की तलाश जारी है।
