मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए सुप्रीम कोर्ट में खुद से पैरवी कर चर्चा में आए जबलपुर के 19 वर्षीय छात्र अथर्व चतुर्वेदी को बड़ी राहत मिली है। मैक्स हे …और पढ़ें

HighLights
- दो बार NEET पास पर नहीं मिला हक
- कॉलेजों ने किया मना तो सुप्रीम कोर्ट पहुंचा छात्र
- अब फाउंडेशन उठाएगा पढ़ाई का पूरा खर्च
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए सुप्रीम कोर्ट में खुद से पैरवी कर चर्चा में आए जबलपुर के 19 वर्षीय छात्र अथर्व चतुर्वेदी को बड़ी राहत मिली है। मैक्स हेल्थकेयर फाउंडेशन ने मैक्स मेडिकल स्कॉलरशिप प्रोग्राम के तहत उनकी एमबीबीएस फीस भरने का निर्णय लिया है। मैक्स मेडिकल स्कॉलरशिप प्रोग्राम के तहत फाउंडेशन उनकी पूरी फीस भरेगा।
सपना पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में खुद रखी अपनी बात
दरअसल, अथर्व ने कक्षा 12वीं पास करने के बाद इंजीनियरिंग और मेडिकल दोनों के एंट्रेंस क्लियर किए थे। नीट परीक्षा उन्होंने दो बार पास की और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) पात्रता होने के बावजूद उन्हें निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिला। तर्क दिया गया कि राज्य के निजी कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस कोटा लागू नहीं है। इसके बाद अपना सपना पूरा करने अथर्व ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और अथर्व का संघर्ष
फरवरी 2026 में कोर्ट ने राहत देते हुए राज्य शासन के अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शासकीय मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाएं। कोर्ट के इस फैसले से अथर्व को जबलपुर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश तो मिला, लेकिन शिक्षा का खर्च एक बड़ी चुनौती थी। इसी दौरान फाउंडेशन ने उनसे संपर्क किया और मैक्स मेडिकल स्कॉलरशिप प्रोग्राम के तहत सहायता देने का निर्णय लिया, ताकि वह बिना आर्थिक परेशानी के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
100 छात्रों को मिलती है स्कॉलरशिप
बता दें कि मैक्स फाउंडेशन हर साल 100 मेडिकल छात्रों को यह स्कॉलरशिप देता है। इस मदद के बाद अब अथर्व अपना डॉक्टर बनने का सपना निर्बाध रूप से पूरा कर सकेंगे।
