मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री व प्रबल दावेदार नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने पर शुक्रवार को शुरू हुआ उबाल और उनकी …और पढ़ें

HighLights
- सीएम हाउस पहुंचकर खत्म हुई नरोत्तम मिश्रा की नाराजगी
- सीएम से मिलकर नरोत्तम मिश्रा ने कहा- हम जीतेंगे
- कांग्रेस ने तीन बार के विधायक घनश्याम सिंह को प्रत्याशी घोषित किया
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री व प्रबल दावेदार नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने पर शुक्रवार को शुरू हुआ उबाल और उनकी नाराजगी शनिवार रात मुख्यमंत्री आवास पर खत्म हो गई। नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से मुलाकात की। बैठक में दतिया उपचुनाव को लेकर बातचीत हुई। सभी नेताओं ने ‘ऑल इज वैल’ का संदेश दिया। कहा गया कि पार्टी सर्वोपरि है और सभी कार्यकर्ता संगठन के निर्णय के साथ पूर्ण प्रतिबद्धता से खड़े हैं।
इस बीच कांग्रेस ने तीन बार के विधायक घनश्याम सिंह को प्रत्याशी घोषित कर दिया। बैठक के बाद नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से कहा कि दतिया सीट को जिताने पर बात हुई, हम यह सीट जीतेंगे। समर्थकों को पहले ही कह चुका है सभी धैर्य व शांति का परिचय दें। मैं हमारे उम्मीदवार (आशुतोष तिवारी) का नामांकन दाखिल कराने 13 जुलाई को निश्चित रूप से जाऊंगा। अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि दतिया में कुछ कार्यकर्ताओं ने त्यागपत्र दिए हैं, लेकिन मुझे कोई भी इस्तीफा नहीं मिला। संगठन ने तय किया है कि हम किसी भी कार्यकर्ता का इस्तीफा स्वीकार नहीं करेंगे।
गुस्साए समर्थकों ने 12 घंटे रोके रखा हाईवे, पुलिस ने किया लाठीचार्ज
दतिया प्रतिनिधि के अनुसार नरोत्तम मिश्रा को भाजपा से टिकट न दिए जाने को लेकर उनके समर्थकों द्वारा शुक्रवार शाम से लगाया गया ग्वालियर-झांसी हाईवे पर जाम और प्रदर्शन शनिवार सुबह हिंसक हो गया। जाम के कारण ग्वालियर और झांसी सीमा पर 15 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार को देखते हुए प्रशासन ने शनिवार तड़के सख्त रुख अपनाना शुरू किया।
इसके प्रतिकार में समर्थकों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। इसमें एएसपी मंजीत चावल, भांडेर एसडीओपी पूनम चंद्र यादव और आठ पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात बेकाबू होने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। बल प्रयोग कर यातायात बहाल कराया। जिला प्रशासन ने पूरे जिले में बीएनएस की प्रतिबंधात्मक धारा 163 लागू कर दी। बता दें, दतिया सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा और तीन अगस्त को मतगणना होगी।
नरोत्तम मिश्रा भांप नहीं पाए बदला हुआ राजनीतिक माहौल
मध्य प्रदेश में पिछली भाजपा यानी शिवराज सरकार में गृह मंत्री रहे डा. नरोत्तम मिश्रा के बारे में आम धारणा थी कि वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी हैं। वर्ष 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मिलकर कमल नाथ सरकार को गिराने और उन्हें भाजपा में शामिल करवाने में नरोत्तम मिश्रा ने केंद्रीय नेतृत्व के साथ मिलकर मुख्य भूमिका निभाई थी। शिवराज सिंह चौहान सरकार में वे कई विभागों के मंत्री रहे। हर राजनीतिक संकट को टालने के कारण संकटमोचक कहे जाते थे।
इसके बाद भी नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलना भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर जमीनी फीडबैक, एंटी-इन्कंबेंसी और पीढ़ीगत बदलाव को प्राथमिकता देने का सीधा परिणाम है। केंद्रीय नेतृत्व ने गुरुवार- शुक्रवार को फीडबैक जुटाया। पार्टी ने स्थानीय सर्वे रिपोर्ट को नरोत्तम मिश्रा पर प्राथमिकता दी।
नरोत्तम मिश्रा को भारी पड़ी थी जनता से दूरी
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट पर तत्कालीन गृह मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा की हार प्रदेश की सबसे चर्चित चुनावी घटनाओं में रही थी। उपचुनाव में भाजपा ने उनकी जगह नए उम्मीदवार को उतारकर यह संकेत दे दिया है कि पार्टी ने वर्ष 2023 के चुनावी संदेश को गंभीरता से लिया है। दतिया में विकास कार्यों के बावजूद नरोत्तम मिश्रा की हार के बाद भाजपा और स्थानीय लोगों में यह चर्चा भी रही कि उनके कुछ सहयोगियों और रिश्तेदारों की बढ़ती दखलअंदाजी से कार्यकर्ताओं और आम लोगों में असंतोष पैदा हुआ था।
