सुप्रीम कोर्ट ने चर्चित ज्योति हत्याकांड में पीयूष श्यामदासानी, रेनू उर्फ अखिलेश और सोनू की अपीलें खारिज कर हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने तीन दोषियों की अपीलें खारिज कीं
- पीयूष समेत तीनों की उम्रकैद की सजा बरकरार
- मनीषा मखीजा की दोषमुक्ति भी कायम रखी गई
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। चर्चित ज्योति हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषी पीयूष श्यामदासानी, रेनू उर्फ अखिलेश और सोनू की अपीलें खारिज कर दी हैं। सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए तीनों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। वहीं, मनीषा मखीजा को हाई कोर्ट से मिली दोषमुक्ति को भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के आधार पर कायम रखा गया।
2014 में सामने आया था चर्चित हत्याकांड
यह मामला 27 जुलाई 2014 की रात का है। पांडुनगर निवासी बिस्किट कारोबारी के पुत्र पीयूष श्यामदासानी अपनी पत्नी ज्योति उर्फ पूजा के साथ स्वरूप नगर स्थित वरांडा होटल गया था। रात करीब 11:30 बजे उसने पुलिस को सूचना दी कि बाइक सवार लोगों ने उसकी कार रोककर उसके साथ मारपीट की और कार लेकर फरार हो गए, जिसमें उसकी पत्नी भी मौजूद थी। बाद में पुलिस ने कल्याणपुर पनकी रोड पर खड़ी कार से ज्योति का शव बरामद किया। जांच में सामने आया कि उसकी चाकू से गोदकर हत्या की गई थी।
निचली अदालत से HC और फिर SC तक पहुंचा मामला
जांच के बाद पुलिस ने पीयूष श्यामदासानी, मनीषा मखीजा, ड्राइवर अवधेश, रेनू उर्फ अखिलेश, सोनू और आशीष कश्यप को गिरफ्तार किया। कानपुर के सत्र न्यायालय ने 20 अक्टूबर 2022 को पीयूष समेत अन्य आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
इसके बाद सभी छह दोषियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील दायर की। 29 नवंबर 2024 को हाई कोर्ट ने पांच दोषियों की सजा बरकरार रखते हुए मनीषा मखीजा को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया था।
बाद में पीयूष, रेनू उर्फ अखिलेश और सोनू ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जबकि मनीषा की दोषमुक्ति के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार भी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय को पूरी तरह बरकरार रखा है।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने रखीं दलीलें
अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि ज्योति की हत्या पूर्व नियोजित साजिश का परिणाम थी और सभी आरोपितों की इसमें समान मंशा थी। वहीं, अपीलकर्ताओं ने दावा किया कि उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं और केवल कॉल रिकॉर्ड के आधार पर उन्हें साजिशकर्ता बताया गया। उनका यह भी तर्क था कि जिन मोबाइल नंबरों का उल्लेख किया गया, वे उनके नहीं थे। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हाई कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया था।
जबलपुर की बेटी थीं ज्योति
ज्योति, जबलपुर के उद्योगपति शंकर नाग्देव की बेटी थीं। उनका विवाह वर्ष 2012 में कानपुर के बिस्किट कारोबारी ओमप्रकाश श्यामदासानी के बेटे पीयूष श्यामदासानी से हुआ था। शुरुआती समय में सब सामान्य रहा, लेकिन बाद में पति-पत्नी के रिश्ते में मनीषा मखीजा की मौजूदगी को लेकर विवाद पैदा होने की बात सामने आई थी।
