जांच में खुलासा हुआ कि पोर्टल पर हजारों क्विंटल गेहूं की एंट्री तो कर दी गई, लेकिन वास्तविक रूप से वह अनाज गोदाम में मौजूद ही नहीं था। …और पढ़ें

HighLights
- 661 किसानों के नाम पर समर्थन मूल्य पर हुई फर्जी खरीदी
- निगरानी अधिकारियों की नाक के नीचे होता रहा फर्जीवाड़ा
- सर्वेयर और नोडल अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मझौली क्षेत्र के मां अन्नपूर्णा वेयरहाउस में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि पोर्टल पर हजारों क्विंटल गेहूं की एंट्री तो कर दी गई, लेकिन वास्तविक रूप से वह अनाज गोदाम में मौजूद ही नहीं था। मामले में 5,168 क्विंटल गेहूं की शॉर्टेज मिलने के बाद खाद्य विभाग ने प्रकरण तैयार कर कलेक्टर न्यायालय को भेज दिया है।
661 किसानों के नाम पर खरीदी
जांच के अनुसार खरीदी केंद्र में 661 किसानों के नाम पर गेहूं खरीदी दर्ज की गई थी। सत्यापन के दौरान पोर्टल पर दर्ज मात्रा और वेयरहाउस में उपलब्ध स्टॉक में भारी अंतर मिला। कई किसानों को इस बात की जानकारी तक नहीं है कि उनके नाम पर अतिरिक्त गेहूं चढ़ाया गया है।
स्लॉट से ज्यादा एंट्री कर किया फर्जीवाड़ा
खाद्य विभाग की जांच में सामने आया कि महिला ग्राम संगठन हटौली भूमि ग्राम संगठन को खरीदी संस्था बनाया गया था। संस्था की जिम्मेदारी रीना लोधी के पास थी, जबकि कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में मयूरी लोधी और शुभम बर्मन की नियुक्ति की गई थी। आरोप है कि खरीदी संचालन का काम अमन पांडे और आकाश पांडे को सौंपा गया, जिन्होंने स्लॉट से अधिक मात्रा पोर्टल पर दर्ज कर फर्जी खरीदी दिखाई।
निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
मामले ने निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमानुसार प्रतिदिन खरीदी और स्टॉक का सत्यापन खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम और एनआरएलएम के अधिकारियों को करना था, लेकिन इसके बावजूद हजारों क्विंटल गेहूं की कमी लंबे समय तक पकड़ में नहीं आई। जांच में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी, सर्वेयर और नोडल अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।
