अधिकरण ने राज्य शासन एवं केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है तथा अगली सुनवाई 25 अगस्त, 2026 निर्धारित की है। डीपीसी आज, इसीलिए बुधवार का आद…और पढ़ें

HighLights
- परिणाम सीलबंद लिफाफे में रखने के निर्देश
- पदोन्नति अधिकार प्रभावित होने पर हस्तक्षेप
- 2014 में मिश्रा को आरोपों से मुक्त कर दिया था
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के न्यायिक सदस्य अखिल कुमार श्रीवास्तव व प्रशासनिक सदस्य मल्लिका आर्या की युगलपीठ ने विभागीय कार्रवाई में विलंब के कारण किसी अधिकारी के पदोन्नति अधिकार प्रभावित होने के मामले में हस्तक्षेप किया है।
(डीपीसी) में विचारार्थ शामिल करने के निर्देश
अधिकरण ने राज्य पुलिस सेवा के 1998 बैच के अधिकारी व वर्तमान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रीवा संदीप मिश्रा की उम्मीदवारी को आइपीएस चयन वर्ष-2025 की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) में विचारार्थ शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
दंड की प्रभावशीलता समाप्त हो चुकी है
उनके चयन संबंधी निर्णय को अंतिम आदेश तक सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखा जाएगा। अधिवक्ता पंकज दुबे व अक्षय खंडेलवाल ने अधिकरण के समक्ष दलील दी कि दंड की प्रभावशीलता समाप्त हो चुकी है, फिर भी उसके आधार पर याचिकाकर्ता को पदोन्नति प्रक्रिया से बाहर किए जाने की आशंका है।
वर्ष 2014 में मिश्रा को आरोपों से मुक्त कर दिया
याचिका में कहा गया कि वर्ष 2010 में जारी आरोप-पत्र के संबंध में जांच पूरी होने पर वर्ष 2014 में मिश्रा को आरोपों से मुक्त कर दिया गया था, लेकिन उसी प्रकरण के संदर्भ में वर्ष 2018 में दो वेतनवृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने का दंडादेश पारित कर दिया गया।
डीपीसी की बैठक 25 जून को प्रस्तावित
याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस विलंबित विभागीय कार्रवाई का प्रतिकूल असर अब उनकी आइपीएस पदोन्नति की पात्रता पर पड़ रहा है, जबकि चयन वर्ष-2025 के लिए उनका नाम विचारार्थ सूची में शामिल है और डीपीसी की बैठक 25 जून को प्रस्तावित है।
