बैग में रखे अमचूर पाउडर को एयरपोर्ट की एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर मशीन ने हेरोइन और अन्य ड्रग्स बताकर अलार्म दे दिया था। …और पढ़ें

HighLights
- हाई कोर्ट ने 16 वर्ष पूर्व मामले में चुकाना होगा हर्जाना
- न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने आदेश सुनाया
- दिल्ली के लिए फ्लाइट पकड़ने भोपाल एयरपोर्ट पहुंचे थे
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने 16 वर्ष पूर्व अमचूर को हेरोइन बताने के मामले में 10 लाख हर्जाने का आदेश सुनाया है। मामला ग्वालियर निवासी इंजीनियर से संबंधित है, जिसे 2010 में भोपाल एयरपोर्ट की मशीन की गलती के कारण 57 दिन की जेल काटनी पड़ी थी।
सुरक्षा जांच के दौरान रोक लिया गया था
दरअसल, दिल्ली के लिए फ्लाइट पकड़ने भोपाल एयरपोर्ट पहुंचे इंजीनियर अजय सिंह को सुरक्षा जांच के दौरान रोक लिया गया था।
केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया था
बैग में रखे अमचूर पाउडर को एयरपोर्ट की एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर मशीन ने हेरोइन और अन्य ड्रग्स बताकर अलार्म दे दिया था। इसके बाद अजय पर एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया था। 57 दिन बाद फारेंसिक जांच में सामने आया कि बैग में रखा पाउडर अमचूर मसाला था।
राज्य की फारेंसिक जांच व्यवस्था पर तल्ख़ टिप्पणी
हाई कोर्ट ने राज्य की फारेंसिक जांच व्यवस्था पर तल्ख़ टिप्पणी करते हुए अजय सिंह के हक में हर्जाना देने का आदेश दिया है।
विशेषज्ञ अधिकारियों की तैनाती का क्या औचित्य
कोर्ट ने साफ किया कि यदि राज्य की प्रयोगशालाओं के पास जांच के जरूरी उपकरण ही नहीं हैं तो बड़े ढांचे और विशेषज्ञ अधिकारियों की तैनाती का क्या औचित्य है।
जेल में रहना जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन
संसाधनों की कमी के कारण एक निर्दोष व्यक्ति को 57 दिन जेल में रहना पड़ा, जो उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि एक महीने के भीतर प्रदेश की सभी रीजनल फारेंसिक साइंस लेबोरेटरीज का निरीक्षण कर जरूरी उपकरण और स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
पूरा घटनाक्रम तारीखों में
- 7 मई 2010: भोपाल एयरपोर्ट पर अजय सिंह को रोका गया, सीआईएसएफ ने गांधीनगर थाना पुलिस को सूचना दी।
- 10 मई 2010: बैग से मिले सैंपल जांच के लिए रीजनल फॉरेंसिक लैब भेजे गए।
- 19 मई 2010: आरएफएसएल ने यह कहते हुए सैंपल लौटा दिए कि एमडीईए टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है। बाद में सैंपल हैदराबाद की केंद्रीय लैब भेजे गए।
- 30 जून 2010: केंद्रीय फॉरेंसिक लैब ने रिपोर्ट दी कि सैंपल में मादक पदार्थ नहीं है।
- 2 जुलाई 2010: अजय सिंह रिहा हुए।
- 10 दिसंबर 2010: विशेष अदालत ने केस बंद करने की अनुमति दी।
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