हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि दो बालिग अपनी स्वतंत्र इच्छा और बिना किसी प्रलोभन के …और पढ़ें

HighLights
- MP High Court: सहमति से लंबे समय तक रहे संबंध दुष्कर्म नहीं
- सहमति से बने संबंधों पर दुष्कर्म का केस नहीं बनता: हाई कोर्ट
- हाई कोर्ट ने केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ दर्ज FIR की निरस्त
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि दो बालिग अपनी स्वतंत्र इच्छा और बिना किसी प्रलोभन के लंबे समय तक संबंध में रहते हैं, तो उसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति की एकलपीठ ने केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की एफआईआर और ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक प्रकरण को निरस्त करने के आदेश दिए।
महिला ने लगाया था नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म और शादी के झांसे का आरोप
भोपाल निवासी केंद्रीय कर्मचारी ने याचिका में कहा था कि उसकी विवाहित सहकर्मी ने छोला थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि वर्ष 2020 में नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया और शादी का झांसा देकर चार वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए गए।
कोर्ट का निर्णय: महिला शिक्षित और विवाहित, तलाक के बिना शादी संभव नहीं थी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता शिक्षित, विवाहित थी और उसका एक बच्चा भी था। वह स्वयं जानती थी कि पति से तलाक लिए बिना आरोपी से विवाह संभव नहीं है। कोर्ट ने माना कि दोनों के बीच लंबे समय तक सहमति से संबंध रहे तथा रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि आरोपी ने महिला को ब्लैकमेल किया, धमकाया या शादी का झूठा वादा कर उसकी सहमति प्राप्त की।
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इन परिस्थितियों में दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने एफआईआर और लंबित आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी।
