मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी गांधी सागर की पांचों 23-23 मेगावाट क्षमता वाली इकाइयों का नवीनीकरण व आधुनिकीकरण करेगी।

HighLights
- गांधी सागर जल विद्युत गृह का होगा कायाकल्प
- बढ़ेगी गांधी सागर की बिजली उत्पादन क्षमता
- 115 से बढ़कर 121.25 मेगावाट होगी कुल क्षमता
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। वर्षों से पुरानी मशीनरी, तकनीकी समस्याओं और बाढ़ की मार झेल रहे गांधी सागर जल विद्युत गृह को अब नया जीवन देने की तैयारी है। मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी गांधी सागर की पांचों 23-23 मेगावाट क्षमता वाली इकाइयों का नवीनीकरण व आधुनिकीकरण करेगी। इसके लिए राज्य सरकार ने 464.55 करोड़ रुपये की संशोधित लागत को मंजूरी दी है।
पांचों इकाइयों की कुल स्थापित क्षमता 115 मेगावाट
इसके बाद प्रत्येक इकाई की उत्पादन क्षमता में करीब 1.25 मेगावाट की वृद्धि होने का दावा कंपनी ने किया है। वर्तमान में गांधी सागर जल विद्युत गृह की पांचों इकाइयों की कुल स्थापित क्षमता 115 मेगावाट है। प्रत्येक इकाई की क्षमता 23 मेगावाट है। आधुनिकीकरण के बाद प्रत्येक इकाई में 1.25 मेगावाट की वृद्धि होने पर कुल क्षमता करीब 121.25 मेगावाट हो जाएगी। यानी बिजलीघर की स्थापित क्षमता में करीब 6.25 मेगावाट की बढ़ोतरी होगी।
2019 की बाढ़ में पांचों इकाइयां हुई थीं जलमग्न
विधानसभा में दिए गए सरकारी जवाब के अनुसार, 14 सितंबर 2019 को पांचों इकाइयां जलमग्न हो गई थीं। पानी उतरने के बाद मरम्मत और परीक्षण के जरिए कुछ इकाइयों को दोबारा चालू किया गया, लेकिन बिजलीघर पहले की तरह पूरी क्षमता से नियमित उत्पादन नहीं कर सका था। यह भी सामने आया कि बिजलीघर की इकाइयां उस समय करीब 58 वर्ष पुरानी हो चुकी थीं, जबकि सामान्य तौर पर जल विद्युत इकाइयों का सेवा जीवन करीब 35 वर्ष माना जाता है।
1960 से 1962 के बीच स्थापित की गई इकाइयों से नवंबर 2024 में पांच में से केवल दो इकाइयों से करीब 29.5 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था। फिलहाल गांधी सागर की दूसरी इकाई करीब दो साल से पानी में डूबी रहने के कारण बंद है। दूसरी ओर अन्य इकाइयों में भी लगातार संचालन और पुरानी तकनीक के कारण आधुनिकीकरण की जरूरत महसूस की जा रही थी।
