जांच के दौरान खुलासा हुआ कि आदित्य ने मृतका से रुपये उधार लिए थे। मृतका लगातार रुपये वापस मांग रही थी, जिससे परेशान होकर तीनों ने हत्या की साजिश रची।

HighLights
- मृतका के नाखूनों व आरोपित के कपड़ों पर मिला रक्त।
- जांच के दौरान डीएनए मिलान ने खोली साजिश की परतें।
- आरोपियों ने चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी थी।
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। उधार दिए गए रुपये वापस मांगना एक महिला के लिए जानलेवा साबित हुआ। रुपये लौटाने के दबाव से परेशान तीन युवकों ने योजनाबद्ध तरीके से उसकी हत्या कर दी। इस मामले में सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश ज्योति राजपूत की अदालत ने शनिवार को तीनों दोषियों को हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
दोषियों आदित्य उर्फ आदी साहू, धीरेन्द्र और सरफराज को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 व 120-बी के तहत दोषी मानते हुए 11-11 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक दीप्ति पटेल ने पैरवी की।
अभियोजन के अनुसार 19 अप्रैल 2023 को मृतका की सास नर्मदी बाई ने थाना टीला जमालपुरा में बहू के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चार दिन बाद 23 अप्रैल को थाना बिलखिरिया क्षेत्र के कन्हासैया स्थित एक खेत के टपरे में 30 से 35 वर्षीय महिला का शव मिला, जिसकी पहचान बाद में मृतका के पति और सास ने की।
पुलिस जांच में मृतका के मोबाइल की काल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) खंगाली गई। इसमें पता चला कि घटना वाले दिन एक मोबाइल नंबर से मृतका से 13 बार बातचीत हुई थी। जांच में यह सिम सरफराज के नाम पर मिली, जिसे घटना के बाद बंद कर दिया गया था। तकनीकी साक्ष्यों से यह भी सामने आया कि घटना के समय तीनों आरोपितों और मृतका की मोबाइल लोकेशन कन्हासैया क्षेत्र में थी।
जांच के दौरान खुलासा हुआ कि आदित्य ने मृतका से रुपये उधार लिए थे। मृतका लगातार रुपये वापस मांग रही थी, जिससे परेशान होकर तीनों ने हत्या की साजिश रची।
योजना के तहत पहले एक व्यक्ति का मोबाइल छीनकर उसकी सिम का इस्तेमाल किया गया। 19 अप्रैल को उसी सिम से मृतका को फोन कर रुपये लौटाने के बहाने नर्मदा अस्पताल के बाहर बुलाया गया। वहां से उसे आटो में बैठाकर कन्हासैया के खंडहर में ले जाया गया, जहां चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई।
विज्ञानी साक्ष्यों से आरोपितों को मिला आजीवन कारावास
मामले में विज्ञानी साक्ष्य निर्णायक साबित हुए। न्यायालय की अनुमति से मृतका के नाखूनों में मिले रक्त और आरोपित आदित्य के कपड़ों पर मिले रक्त का डीएनए परीक्षण कराया गया। दोनों नमूनों का मिलान होने से अभियोजन का पक्ष मजबूत हुआ। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तीनों आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
