छात्रों ने कुलपति को ज्ञापन सौंपकर सीबीआई जांच की मांग की है। परीक्षा परिणाम व पुनर्मूल्यांकन में देरी पर परीक्षा नियंत्रक को हटाने की मांग भी उठाई गई…और पढ़ें

HighLights
- गोपनीय प्रश्नपत्र की छपाई के ठेके को लेकर सवाल
- पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं की जांच की मांग
- कुलपति को ज्ञापन सौंपकर सीबीआई जांच की मांग
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में गोपनीय प्रश्नपत्र मुद्रण की निविदा प्रक्रिया और पूर्व में सामने आए पेपर लीक प्रकरण को लेकर एनएसयूआई के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने सवाल उठाए हैं।
टेक्निकल एजुकेशन के जिला अध्यक्ष पीयूष पवार ने कुलपति को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
नियमों की अनदेखी का आरोप
ज्ञापन में कहा गया कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा में प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जनवरी 2026 में प्रश्नपत्रों की छपाई का कान्ट्रैक्ट नियमों को ताक पर रखकर आयोग्य को दे दिया गया।
ज्ञापन के अनुसार, गोपनीय प्रश्नपत्र मुद्रण के लिए जारी निविदा में न्यूनतम 20 वर्ष का अनुभव, शासकीय संस्थाओं के लिए गोपनीय मुद्रण का अनुभव और 50 लाख रुपये वार्षिक टर्नओवर सहित कई शर्तें रखी गई थीं। लेकिन अधिकारियों ने शर्तों में बदलाव कर मुंबई की डाइवर्सिफाइड बिजनेस साल्यूशंस ठेका दे दिया।
एनएसयूआई ने कंपनी की पात्रता और पूर्व अनुभव की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में परीक्षा परिणाम, पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी का आरोप लगाते हुए परीक्षा नियंत्रक को हटाने की मांग की गई है।
पेपर लीक मामलों की जांच की मांग
ज्ञापन में ग्वालियर में हुए पेपर लीक प्रकरण का उल्लेख करते हुए आशंका जताई गई है कि मामला एक से अधिक प्रश्नपत्रों से जुड़ा हो सकता है। जबकि केवल एक पेपर निरस्त कर दोबारा परीक्षा कराई गई।
वहीं, भोपाल के एसबी पॉलिटेक्निक में परीक्षा के दौरान कथित अनियमितताओं की भी जांच की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ज्ञापन में पेपर लीक प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग भी शामिल है। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के विभाजन संबंधी किसी भी प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग भी रखी है।
