राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश को पांच माह बाद अब भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) का अध्यक्ष मिलेगा। मार्च में एपी श्रीवास्तव का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से यह पद रिक्त था।
नियुक्ति के लिए मुख्य सचिव वेतनमान वाले सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों की सूची तैयारी करके हाई कोर्ट भेजी गई थी मगर इसमें केवल सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों के नाम होने से आपत्ति जताकर वापस लौटा दिया गया।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने दोबारा प्रक्रिया की और 20 लोगों के नामों की सूची भेजी। मुख्य न्यायाधीश और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के बीच चयन को लेकर बैठक के बाद अब मुख्यमंत्री नाम को अंतिम रूप देंगे।
आवासीय परियोजनाओं की अनुमति अटकी
बता दें कि रेरा में अध्यक्ष और सदस्य न होने के कारण आवासीय परियोजनाओं की अनुमति अटकी हुई हैं। भू-संपदा अधिनियम में प्रावधान है कि अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद उसे आसानी से हटाया नहीं जा सकता है। ऐसी परिस्थिति बनती है तो हाई कोर्ट के न्यायाधीश द्वारा जांच कराई जाती है।
इसके आधार पर अध्यक्ष को हटाया जा सकता है। एपी श्रीवास्तव को पद से हटाने के निर्देश दे दिए गए थे लेकिन बाद में प्रक्रिया का अध्ययन करने के बाद कार्यकाल पूरा होने की प्रतीक्षा करना ठीक समझा गया।
नई नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ की गई
हर बार की तरह विज्ञापन निकालकर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों के नाम भेज दिए गए। इस पर मुख्य न्यायाधीश द्वारा आपत्ति उठाई गई तो दोबारा नाम भेजे गए। इसमें सेवानिवृत्त अधिकारियों के साथ दूसरों के नाम भी शामिल थे।
मुख्य न्यायाधीश और मुख्य सचिव के बीच रेरा के नए अध्यक्ष को लेकर चर्चा हुई। अब मुख्यमंत्री सोमवार को इस संबंध में अंतिम दौर की चर्चा करके पैनल में से एक नाम तय कर देंगे। सूत्रों का कहना है कि इसमें 1988 बैच के सेवानिवृत्त अधिकारी शैलेंद्र सिंह का नाम भी शामिल है जो शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा विभाग में पदस्थ थे।
उल्लेखनीय है कि उस समय डॉ.मोहन यादव उच्च शिक्षा मंत्री थे। बताया जा रहा है कि अध्यक्ष के साथ दो सदस्य भी नियुक्त किए जाएंगे, जिसमें एक न्यायिक सेवा और एक सचिव या समकक्ष पद से सेवानिवृत्त अधिकारी होगा।
रेरा के फैसले व आदेश पर अपील
रेरा के निर्णय से असंतुष्ट होने पर उसके विरुद्ध अपील के लिए भू-संपदा अपीलीय अधिकरण बनाया गया है। 3 जुलाई को इसका अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश बिनोद कुमार द्विवेदी को बनाया गया। सदस्य की नियुक्ति और होनी है।
अपील संबंधित को आदेश की तारीख से 60 दिनों के भीतर करनी होती है। अधिकरण के निर्णय से यदि कोई प्रभावित व्यक्ति सहमत नहीं हैं, तो वह उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकते हैं।
