हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा अपने अंशदान में वृद्धि किए जाने का लाभ कर्मियों तक पहुंचना चाहिए था, न कि राज्य सरकार अपने हिस्से में …और पढ़ें

HighLights
- एमपी हाई कोर्ट ने लगाई मुहर : कटौती का फैसला अवैध
- कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील आंशिक रूप से स्वीकार की
- एकलपीठ के आदेश में केवल ब्याज वाले हिस्से में संशोधन
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने प्रदेश की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बड़ी राहत देते हुए उनके मानदेय में की गई कटौती को अस्वीकार्य माना है।
कटौती कर उनका वास्तविक मानदेय कम कर दे
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा अपने अंशदान में वृद्धि किए जाने का लाभ कर्मियों तक पहुंचना चाहिए था, न कि राज्य सरकार अपने हिस्से में कटौती कर उनका वास्तविक मानदेय कम कर दे।
कोर्ट ने एकलपीठ के उस आदेश में संशोधन किया है
हालांकि कोर्ट ने एकलपीठ के उस आदेश में संशोधन किया है, जिसमें बकाया राशि पर ब्याज देने के निर्देश दिए गए थे। अब कार्यकर्ताओं को एरियर तो मिलेगा, लेकिन उस पर ब्याज नहीं दिया जाएगा। कर्ट ने राज्य शासन की अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। शासन की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखा।
2019 से घटा दिया था राज्य का अंशदान
यह मामला मप्र बुलंद आवाज नारी शक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका संगठन, भोपाल की याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया था कि 27 जून, 2019 के बाद केंद्र सरकार ने अपना अंशदान बढ़ाया, लेकिन राज्य सरकार ने अपने हिस्से में कटौती कर दी। इससे कार्यकर्ताओं को मिलने वाला कुल मानदेय बढ़ने के बजाय लगभग पहले जैसा ही रह गया और केंद्र की बढ़ी हुई सहायता का लाभ उन्हें नहीं मिल सका।
मानदेय बहाल रखने का आदेश बरकरार
दरअसल, हाई कोर्ट एकलपीठ ने तीन फरवरी, 2026 को राज्य सरकार को 27 जून, 2019 से पहले की व्यवस्था के अनुसार मानदेय बहाल करने तथा छह माह के भीतर ब्याज सहित एरियर देने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने मानदेय बहाली और एरियर भुगतान के आदेश को सही ठहराया, लेकिन कहा कि मूल याचिका में ब्याज देने का कोई पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था। इसी कारण ब्याज संबंधी निर्देश को निरस्त कर दिया गया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को अपने पूर्व अंशदान की व्यवस्था बनाए रखनी होगी तथा पात्र आंगनबाड़ी कर्मियों को ग्रेच्युटी का लाभ भी दिया जाएगा।
सरकार को आंशिक राहत, कर्मियों का मूल अधिकार बरकरार
फैसले से राज्य शासन को ब्याज के रूप में होने वाले बड़े वित्तीय भार से राहत मिली है, लेकिन मानदेय बहाली और एरियर भुगतान की जिम्मेदारी यथावत रहेगी। इसका लाभ प्रदेशभर की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मिलेगा।
यह फैसला केवल वेतन विवाद का निपटारा नहीं है, बल्कि कल्याणकारी योजनाओं में केंद्र और राज्य की वित्तीय हिस्सेदारी के सिद्धांत को भी स्पष्ट करता है। हाई कोर्ट ने संकेत दिया है कि केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारियों के हित में बढ़ाई गई आर्थिक सहायता को राज्य सरकार अपने अंशदान में कटौती का आधार नहीं बना सकती। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्याज का दावा तभी स्वीकार होगा, जब उसके समर्थन में ठोस कानूनी आधार मौजूद हो। यही कारण है कि इस निर्णय में कर्मचारियों के अधिकार और सरकार के वित्तीय दायित्व, दोनों के बीच संतुलन स्थापित किया गया है।
