मामले में अधिवक्ता अमित सिंह सेंगर ने पैरवी करते हुए संयुक्त समिति की रिपोर्ट और कंपनी द्वारा अपनाए जा रहे प्रदूषण नियंत्रण उपायों को ट्रिब्यूनल के सम…और पढ़ें

HighLights
- याचिका अहम निर्देशों के साथ निराकृत कर दी
- पीठ ने एक सितंबर 2026 को आदेश पारित किया
- 98 प्रतिशत उत्सर्जन निर्धारित मानकों के भीतर पाया
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने रीवा जिले के बेला स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड (पूर्व में जेपी सीमेंट) प्लांट और उससे जुड़ी चूना पत्थर खदानों से संबंधित पर्यावरणीय शिकायतों का विभिन्न निर्देशों के साथ निराकरण कर दिया है।
कंपनी और प्रशासन को कई आवश्यक कदम उठाने के निर्देश
संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर वायु एवं जल प्रदूषण के आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के लिए कंपनी और प्रशासन को कई आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति एसके सिंह सिंह विशेषज्ञ सदस्य डा. प्रशांत गर्गावा की पीठ ने एक सितंबर 2026 को आदेश पारित किया।
प्लांट, खदानों और आसपास के गांवों का निरीक्षण किया
आवेदन में प्लांट और खदानों से वायु एवं जल प्रदूषण, धूल उत्सर्जन, भूजल स्तर प्रभावित होने तथा पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे। एनजीटी के निर्देश पर गठित संयुक्त समिति ने प्लांट, खदानों और आसपास के गांवों का निरीक्षण किया।
98 प्रतिशत उत्सर्जन निर्धारित मानकों के भीतर पाया
जांच में 98 प्रतिशत उत्सर्जन निर्धारित मानकों के भीतर पाया गया। हालांकि सोनरा और मधेपुर गांवों में पीएम-10 का स्तर मानक से थोड़ा अधिक मिला। सक्षम प्रयोगशालाओं की वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर उद्योग से व्यापक वायु अथवा जल प्रदूषण के आरोप प्रमाणित नहीं हुए।
हरित क्षेत्र 33 प्रतिशत करने के निर्देश
एनजीटी ने नोरा खदान सीमा पर सुरक्षा एवं हरित पट्टी विकसित करने, पुरानी खदानों के गड्ढों को जल संग्रहण स्रोत के रूप में विकसित करने, सीमा दीवार बनाने तथा हरित क्षेत्र को 33 प्रतिशत तक बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। पर्यावरण स्वीकृति की शर्तों का पालन और यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
सुरक्षित पेयजल व्यवस्था, तालाब गहरीकरण कराएं
रीवा कलेक्टर को भोलगढ़ गांव में पेयजल उपलब्धता का अध्ययन कर सुरक्षित पेयजल व्यवस्था तथा तालाब गहरीकरण की कार्रवाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कंपनी द्वारा पर्यावरणीय शर्तों के अनुपालन की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। इन निर्देशों के साथ एनजीटी ने मूल आवेदन का निराकरण कर दिया।
यह भी पढ़ें- जबलपुर में अधारताल के लक्ष्मी नारायण मंदिर में मूर्ति खंडित, ताले तोड़कर दानपेटी से नकदी चुराई
