नईदुनिया प्रतिनिधि, डिंडौरी। अचानकमार छत्तीसगढ़ से आई 17 वर्षीय का पूर्व करंजिया वन परिक्षेत्र में लगातार मूवमेंट बना हुआ है। वृद्ध बाघिन के मूवमेंट वाले क्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्राहकों को वन विभाग द्वारा अलर्ट किया जा रहा है। जिले भर में अब तक 16030 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण हो चुका है।
जंगलों में माता रोग का भी तेंदूपत्ता में असर
जिले के बजाग, करंजिया सहित समनापुर के जंगलों में माता रोग का भी तेंदूपत्ता में असर दिख रहा है। विभाग ने जिले भर में 45173 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा है।
बसाहट वाले क्षेत्र के आसपास कर रही शिकार
17 प्राथमिक वनोपज समितियों के माध्यम से 327 फडों में खरीदी हो रही है। बाघिन ने बुधवार को भी एक गाय का शिकार किया था। काफी वृद्ध होने के चलते वह तेज भागने वाले जानवरों का शिकार नहीं कर पा रही है। इसलिए बसाहट वाले क्षेत्र के आसपास गाय सहित अन्य मवेशियों का शिकार कर रही है।
327 संग्रहण फड़ों पर तेंदूपत्ता का संग्रहण
उपवनमंडल अधिकारी ने बताया कि वनमंडल डिंडौरी अंतर्गत कुल 17 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियां कार्यरत हैं। इन समितियों के 327 संग्रहण फड़ों पर तेंदूपत्ता का संग्रहण किया जा रहा है। प्रत्येक फड़ पर समिति के प्रबंधक, फड़ मुंशी और वन विभाग के कर्मचारी तैनात किए गए हैं ताकि संग्राहकों को किसी तरह की परेशानी न हो।
सुबह 7 बजे से दोपहर तक होता है संग्रहण
संग्रहण का काम सुबह 7 बजे से शुरू होकर दोपहर तक चलता है। इसके बाद पत्तों की गड्डी बनाकर उन्हें सुखाने और भंडारण का काम किया जाता है। शासन द्वारा इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए चार हजार रुपये प्रति मानक बोरा की दर निर्धारित की गई है।
प्रति सौ पत्ते की गड्डी पर आठ रुपये का भुगतान
एक मानक बोरे में 50 हजार पत्ते होते हैं। इस हिसाब से संग्राहकों को प्रति सौ पत्ते की गड्डी पर आठ रुपये का भुगतान किया जा रहा है। संग्रहण राशि का भुगतान सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में किया जाएगा। इसके लिए सभी संग्राहकों के आधार लिंक खाते अपडेट कराए जा चुके हैं।
अच्छी गुणवत्ता का तेंदूपत्ता करें संग्रहण
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 14 मई तक जिले में 16030.535 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण हो चुका है। यह कुल लक्ष्य का लगभग 35.5 प्रतिशत है। सबसे अधिक संग्रहण बजाग, करंजिया और अमरपुर परिक्षेत्र में हुआ है।
अभी सीजन में 20 से 25 दिन और बचे हैं
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभी सीजन में 20 से 25 दिन और बचे हैं। यदि मौसम साथ देता है तो लक्ष्य आसानी से पूरा हो जाएगा। वन विभाग द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक मात्रा में अच्छी गुणवत्ता का तेंदूपत्ता संग्रहण करें। साफ, बिना छेद वाले और सही आकार के पत्तों की गड्डी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। विभाग ने संग्राहकों से जंगल में आग न लगाने और पेड़ों को नुकसान न पहुंचाने की भी अपील की है।
जिले भर में अब तक 16 हजार मानक बोरे से अधिक तेंदूपत्ता का संग्रहण हो चुका है। विभाग ने इस बार 45173 मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य रखा है। कुछ जगह माता रोग की समस्या जरूर है, लेकिन उससे कोई असर नहीं पड रहा है। दस जून तक संग्रहण जारी रहेगा। अचानक मार क्षेत्र से आई वृद्ध बाघिन का जिस क्षेत्र में मूवमेंट होता है, वहां तेंदूपत्ता संग्राहकों को विशेष तौर पर अलर्ट किया जा रहा है।
सुरेंद्र जाटव, एसडीओ वन विभाग डिंडौरी।
एक सैकड़ा गड्डी पर पांच गड्डी जबरन लेने का आरोप
जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत छपरा के पोषक ग्राम गपैया में 12 मई से तेंदूपत्ता तुड़ाई कार्य शुरू हुआ है। तेंदूपत्ता संग्रहण शुरू होने से पहले ही मजदूरों और ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि फड़ मुंशी द्वारा खुलेआम मनमानी करते हुए ग्रामीणों से जबरन तेंदूपत्ते की गड्डियां ली जा रही हैं।
हर एक सैकड़ा गड्डी पर पांच गड्डी जबरन ले लेता
ग्रामीणों के अनुसार तेंदूपत्ता तोड़ने वाले ग्रामीण दिनभर जंगलों में मेहनत कर पत्ते इकट्ठा करते हैं और उन्हें गड्डियों के रूप में जमा करते हैं। नियम के अनुसार मजदूरों को उनकी मेहनत का पूरा भुगतान मिलना चाहिए, लेकिन फड़ मुंशी हर एक सैकड़ा गड्डी पर पांच गड्डी जबरन ले लेता है।
विरोध करने पर उन्हें धमकाया जाता है
यह वसूली कई वर्षों से लगातार की जा रही है और विरोध करने पर उन्हें धमकाया जाता है। ग्रामीण मजदूरों ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। तेंदूपत्ता सीजन ही उनके लिए सालभर की कमाई का एक बड़ा सहारा होता है। ऐसे में फड़ मुंशी द्वारा जबरन गड्डियां लेना गरीब ग्रामीणों के हक मारने के समान है।
निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
मामले की शिकायत मिलने पर जब स्थानीय जागरूक युवा मौके पर स्थिति देखने पहुंचा, तो उसके साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इस संबंध में वन परिक्षेत्र अधिकारी ने मामले को प्राथमिकता से दिखवाने की बात कही है।
यह भी पढ़ें- जून के अंत में मध्य प्रदेश आएंगे राहुल गांधी, रीवा या उज्जैन में होगा बड़ा संवाद
