याचिकाकर्ता ज्ञानप्रकाश का कहना है कि देश में रासायनिक रिसाव, औद्योगिक दुर्घटनाओं और अन्य पर्यावरणीय हादसों में अनेक लोगों की जान गई तथा कई घायल हुए, …और पढ़ें

HighLights
- भविष्य में इसका उपयोग किस प्रकार किया जाएगा
- केंद्र सरकार और सीपीसीबी) से जवाब तलब
- संचालन और उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर निवासी एवं फोरम फार ट्रैफिक सेफ्टी एंड एनवायरमेंट सेनिटेशन के चेयरमैन ज्ञानप्रकाश की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से जवाब तलब किया है।
फंड का अब तक उपयोग क्यों नहीं किया
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि एक हजार करोड़ रुपये से अधिक के पर्यावरण संरक्षण ग्रीन फंड का अब तक उपयोग क्यों नहीं किया गया और भविष्य में इसका उपयोग किस प्रकार किया जाएगा।
पीठ ने सुनवाई के दौरान आश्चर्य व्यक्त किया
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान आश्चर्य व्यक्त किया कि पर्यावरण संरक्षण कोष की स्थापना वर्ष 1991 के पब्लिक लाइबिलिटी इंश्योरेंस एक्ट के तहत खतरनाक पदार्थों से होने वाली दुर्घटनाओं के पीड़ितों को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन अब तक इस फंड से किसी पीड़ित को मुआवजा दिए जाने का कोई रिकार्ड सामने नहीं आया।
राहत कोष का प्रभावी उपयोग नहीं किया गया
याचिकाकर्ता ज्ञानप्रकाश का कहना है कि देश में रासायनिक रिसाव, औद्योगिक दुर्घटनाओं और अन्य पर्यावरणीय हादसों में अनेक लोगों की जान गई तथा कई घायल हुए, फिर भी राहत कोष का प्रभावी उपयोग नहीं किया गया।
उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग
उन्होंने फंड के संचालन और उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सीपीसीबी को यह भी स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि वर्षों में एकत्र हुई इस राशि का उपयोग किस योजना के तहत किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई में सरकार और बोर्ड को विस्तृत जवाब प्रस्तुत करना होगा।
