उन्होंने यह भी कहा कि अपवादिक स्थिति में कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो सकती है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 27 प्रतिशत आरक्षण का कानून ब …और पढ़ें

HighLights
- हाई कोर्ट में सामान्य वर्ग की ओर से रखा गया पक्ष।
- मामले की अगली सुनवाई 16 जून को निर्धारित है।
- आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय की है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष गुरुवार को लगातार दूसरे दिन अन्य पिछड़ा वर्ग, ओबीसी आरक्षण से जुड़े प्रकरणों की सुनवाई हुई।
सामान्य वर्ग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने दलील दी कि ओबीसी आरक्षण के निर्धारण के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी और एम नागराज के प्रकरणों के मार्गदर्शी सिद्धांत तय किए हैं। इसके तहत शीर्ष अदालत ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय की है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अपवादिक स्थिति में कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो सकती है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 27 प्रतिशत आरक्षण का कानून बनाते समय विधेयक में ओबीसी वर्ग की प्रदेश में कुल आबादी 27 फीसदी का उल्लेख किया है।
वहीं दूसरी ओर सरकार ने अपने जवाब में ओबीसी की कुल आबादी 51 प्रतिशत का शपथ पत्र दिया है। सरकार ने विशेष परिस्थिति का उल्लेख नहीं किया है, इसलिए ओबीसी का 27 प्रतिशत आरक्षण स्थिर रखे जाने योग्य नहीं है।
दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई 16 जून को निर्धारित की है। सामान्य वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी, आदित्य संघी, अंशुल तिवारी व ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह व वरुण ठाकुर उपस्थित रहे।
