पंकज तिवारी, नईदुनिया, जबलपुर। मप्र में छह शासकीय विश्वविद्यालय के साथ जबलपुर की शिक्षा के क्षेत्र में अलग पहचान बनी है। संस्कारधानी को शिक्षाधानी बनाने के लिए तकनीकी विश्वविद्यालय की जरूरत एक दशक से महसूस हो रही थी। जो अब महाकोशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय के बनने के साथ ही पूरी हुई।
जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से यह उपलब्धि मिली
करीब आठ साल से तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रस्ताव को डाॅ. मोहन सरकार में मंजूरी मिली। मप्र सरकार में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और अन्य जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से यह उपलब्धि मिली। विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए करीब 200 करोड़ रुपये का बजट भी मांगा गया है।
क्या होगा फायदा
जबलपुर में वर्तमान में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, नानाजी देशमुख वेटरनरी विश्वविद्यालय, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, धर्मशास्त्र नेशनल ला यूनिवर्सिटी संचालित है। इसके अलावा पं. द्वारका प्रसाद मिश्र प्रौद्योगिकी संस्थान एवं विनिर्माण संस्थान है।
इस पाठ्यक्रम का विश्वविद्यालय भी खुलने जा रहा
अब तकनीकी विश्वविद्यालय की घोषणा के साथ इस पाठ्यक्रम का विश्वविद्यालय भी खुलने जा रहा है। इसमें जबलपुर संभाग के अलावा सागर, शहडोल और रीवा संभाग के सभी जिलों में संचालित सरकारी-निजी तकनीकी शिक्षण संस्थान जुड़ेंगे। यानि इन काॅलेजों के सारी परीक्षा-परिणाम और शोध से जुड़े कार्य के लिए जबलपुर स्थित विश्वविद्यालय में आना होगा।
एक नजर में जेईसी
1947 में बने जबलपुर इंजीनियरिंग कालेज के पास करीब वर्तमान समय में 160 एकड़ का परिसर है। इससे पहले करीब 100 कालेज की जमीन अन्य शासकीय कार्य के लिए अधिगृहीत हो चुकी है। कालेज में 9 स्नातक और 10 स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रम संचालित है।
करीब 130 पद रिक्त है जिन्हें भरा जाना है
एमसीए, एप्लाइड कैमेस्ट्री और एप्लाइड मैथेमेटिक्स के पाठ्यक्रम में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित है। करीब 20 भवन और कई आडिटोरियम है। इसके अलावा 130 पद पर नियमित, संविदा और स्वाशासी फैकल्टी कार्यरत है। करीब इतने ही पद रिक्त है जिन्हें भरा जाना है।
आगे क्या
जेईसी के प्राचार्य डा.राजीव चांडक ने बताया कि शासन ने घोषणा के साथ ही कमेटी बनाई है। जो अब आगे की प्रक्रिया करेगी। कालेज की तरफ से सारी जानकारी दी गई थी। करीब 200 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मांगा है। जिसमें प्रशासनिक भवन का निर्माण , नए पदों का सृजन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव के नेतृत्व में मंत्रि-परिषद ने जबलपुर में ‘महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ की स्थापना को मंजूरी दी है। यह जबलपुर सहित महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नए विश्वविद्यालय से इन क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और संस्थानों की गुणवत्ता को और मजबूती मिलेगी। इस उपलब्धि के साथ ही संस्कारधानी शिक्षाधानी बनने की दिशा में एक कदम और बढ़ गया।
राकेश सिंह, मंत्री लोक निर्माण मप्र
जबलपुर के लिए बड़ी उपलब्धि के तौर पर ‘महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ है। स्किल इंडिया के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव का यह एक बड़ा प्रयास है इससे महाकोशल अंचल के अलावा कई संभाग के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा बल्कि रोजगार के कई अवसर भी पैदा होंगे।
आशीष दुबे, सांसद जबलपुर लोकसभा क्षेत्र
तकनीकी विश्वविद्यालय की सौगात जबलपुर के साथ यह कैंट विधानसभा क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। इसके लिए हम लगातार शासन स्तर पर प्रयास कर रहे थे और मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने इस पर मंजूरी दी जिसके लिए उन्हे जनता की ओर से साधुवाद। क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होगे।
अशोक रोहाणी, विधायक कैंट
जबलपुर में कॉलेजों की संख्या
- 06 विश्वविद्यालय जबलपुर में संचालित है। दो निजी विश्वविद्यालय है।
- 1.75 लाख विद्यार्थी राज्य विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं।
- 01 केंद्र का ट्रिपलआइटी डीएम संस्थान संचालित है।
- 163 संस्थान इसमें तकनीकी, परम्परागत, व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल है।
- 14 संस्थान है जहां मेडिकल शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित होते हैं।
- 11 इंजीनियरिंग कालेज
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