नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को एक बीमाधारक का मेडिक्लेम मनमाने ढंग से निरस्त करना महंगा पड़ गया।
स्पष्ट कारण के दावा खारिज कर सेवा में कमी की
जिला उपभोक्ता आयोग ने माना कि कंपनी ने बिना किसी ठोस साक्ष्य और स्पष्ट कारण के दावा खारिज कर सेवा में कमी की।
मानसिक कष्ट और वाद व्यय देना होगा
आयोग ने कंपनी को 1,07,613 रुपये सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने व मानसिक कष्ट और वाद व्यय के रूप में 7,000 रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया है।
तीन सदस्यीय पीठ ने दायर परिवाद पर पारित किया
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पंकज यादव व सदस्य अमित सिंह तिवारी और सोनल पंडित की तीन सदस्यीय पीठ ने यह आदेश जबलपुर निवासी रोहित जैन की ओर से दायर परिवाद पर पारित किया।
एक्टिव हेल्थ फैमिली फ्लोटर पालिसी ले रखी थी
परिवादी की ओर से अधिवक्ता अरुण जैन ने पक्ष रखा। परिवादी ने बताया कि उसने आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस की ग्रुप एक्टिव हेल्थ फैमिली फ्लोटर पालिसी ले रखी थी।
इलाज में 1.07 लाख रुपये से अधिक खर्च हुए थे
अगस्त-सितंबर, 2020 में न्यूमोनाइटिस के उपचार के लिए लाइफ मेडिसिटी हास्पिटल, जबलपुर में भर्ती होने पर उसके इलाज में 1.07 लाख रुपये से अधिक खर्च हुए थे।
20 मार्च, 2021 को दावा निरस्त कर दिया था
प्रतिपूर्ति का दावा करने पर बीमा कंपनी ने अस्पताल में भर्ती के दौरान लैप्सेस एंड डिस्क्रेपेंसी का हवाला देते हुए 20 मार्च, 2021 को दावा निरस्त कर दिया था।
आयोग के समक्ष कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किया
जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में कहा कि न तो दावा निरस्ती पत्र में इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया और न ही आयोग के समक्ष कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किया गया। रिकार्ड पर उपलब्ध डिस्चार्ज समरी और उपचार संबंधी दस्तावेज वास्तविक इलाज की पुष्टि करते हैं।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में कमी
आयोग ने माना कि अस्पष्ट और मनमाने आधार पर वास्तविक बीमा दावा निरस्त करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में कमी है।
सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करें
आयोग ने बीमा कंपनी को उपचार पर खर्च हुई 1,07,613 रुपये की राशि 20 मार्च 2021 से भुगतान की तिथि तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया।
45 दिन के भीतर करने को कहा गया
मानसिक कष्ट के लिए पांच हजार रुपये और वाद व्यय के लिए दो हजार रुपये देने के निर्देश दिए। आदेश की पालना 45 दिन के भीतर करने को कहा गया।
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