आरोपी 31 मार्च, 2026 से जेल में है, मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं है व पहचान संबंधी साक्ष्य पर प्रथमदृष्टया प्रश्न खड़े होते हैं। इन परि…और पढ़ें

HighLights
- गवाहों से नहीं कराई गई टीआईपी पहचान पर संदेह
- सुप्रीम कोर्ट के प्रभाकर तिवारी फैसले का दिया हवाला
- आरोपित को नियमित जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की
नईदुनिया प्रतिनिध, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने चोरी के एक मामले में आरोपित को नियमित जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि केवल किसी आरोपित का लंबा आपराधिक रिकाॅर्ड होने भर से जमानत स्वतः निरस्त नहीं की जा सकती।
वर्तमान मामले में उसके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य कितने मजबूत हैं
कोर्ट को यह भी देखना होगा कि वर्तमान मामले में उसके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य कितने मजबूत हैं। कोर्ट ने बैतूल निवासी अमन उर्फ चमन की पहली जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए उसे 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए।
आरोपित के विरुद्ध 17 पुराने मामले जरूर दर्ज हैं
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता शंतनु तिवारी ने दलील दी कि आरोपित के विरुद्ध 17 पुराने मामले जरूर दर्ज हैं, लेकिन मौजूदा प्रकरण में अभियोजन का सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य पहचान का है।
आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत से इनकार नहीं
घटना देखने वाले गवाहों से पुलिस ने टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) ही नहीं कराई, जिससे आरोपित की पहचान संदेहास्पद हो गई। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के प्रभाकर तिवारी प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि मात्र आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने पाया कि 31 मार्च, 2026 से जेल में है
राज्य ने जमानत का विरोध किया, लेकिन हाई कोर्ट ने पाया कि 31 मार्च, 2026 से जेल में है, मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं है व पहचान संबंधी साक्ष्य पर प्रथमदृष्टया प्रश्न खड़े होते हैं। इन परिस्थितियों में कोर्ट ने नियमित जमानत मंजूर कर ली।
