गुना से केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के तीन दिवसीय दौरे के दौरान जल संरक्षण और कृषि विकास को लेकर एक बड़ी सौगात सामने आई ह…और पढ़ें

HighLights
- कूनो नदी के उद्गम स्थल कंजा गांव पहुंचे मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया
- जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन पर बोले- जल है तो जीवन है
- गुना से मुरैना तक बहने वाली कूनो नदी के जीर्णोद्धार का प्रोजेक्ट शुरू
नईदुनिया प्रतिनिधि, गुना। गुना से केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के तीन दिवसीय दौरे के दौरान जल संरक्षण और कृषि विकास को लेकर एक बड़ी सौगात सामने आई है। अपने प्रवास के दौरान सिंधिया गुना जिले के कंजा गांव पहुंचे, जो कूनो नदी का उद्गम स्थल है। यहां उन्होंने न केवल पारंपरिक पूजा-अर्चना की, बल्कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के जिला स्तरीय समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
इस मौके पर उन्होंने ₹43 करोड़ की लागत से तैयार ‘कूनो नदी पुनर्जीवन परियोजना’ को जनता को समर्पित किया। यह महत्वाकांक्षी योजना क्षेत्र के पर्यावरण को सुधारने के साथ-साथ स्थानीय किसानों की किस्मत बदलने में भी मददगार साबित होगी।
क्या है कूनो नदी पुनर्जीवन परियोजना?
इस व्यापक परियोजना का मुख्य उद्देश्य जल का संचयन करना, तेजी से गिरते भूजल स्तर को सुधारना और खेती-किसानी के उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए तैयार की गई इस योजना के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- विस्तृत दायरा: इस परियोजना के अंतर्गत क्षेत्र की 23 ग्राम पंचायतों और उनके तहत आने वाले 101 गांवों को शामिल किया गया है।
- बजट और क्षमता: ₹43 करोड़ के कुल बजट से निर्मित इस प्रोजेक्ट के कारण क्षेत्र की जल भंडारण क्षमता में 5.12 MCM (मिलियन क्यूबिक मीटर) की उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
- हरियाली और सिंचाई: कूनो नदी के इस कायाकल्प से इलाके की कृषि सिंचाई क्षमता में करीब 1,800 हेक्टेयर का इजाफा होगा, जिससे किसानों को फसलों के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।
‘एक पेड़ मां के नाम’ और प्रकृति संरक्षण का संदेश
लोकार्पण समारोह के दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने पर्यावरण और मानव जीवन के अंतर्संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता का अस्तित्व तभी तक सुरक्षित है, जब तक हमारी पृथ्वी और प्रकृति सुरक्षित हैं।
इसी दूरगामी सोच के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की सराहना करते हुए उन्होंने बताया कि कूनो नदी के उद्गम क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए 2,500 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। राहत की बात यह है कि इस मुहिम के तहत अब तक 1,700 से अधिक पौधे रोपे भी जा चुके हैं।
लाइफ-लाइन कूनो नदी का भौगोलिक महत्व
जल ही जीवन है के मूलमंत्र को दोहराते हुए सिंधिया ने कहा कि इस पुनर्जीवन परियोजना का सकारात्मक प्रभाव पूरी नदी के प्रवाह तंत्र पर देखने को मिलेगा। कूनो नदी के विषय में कुछ बेहद खास बातें हैं जो इसे विशेष बनाती हैं।
- यह नदी कुल 180 किलोमीटर लंबी है, जिसका उद्गम गुना के कंजा गांव से होता है। इसके बाद यह शिवपुरी, श्योपुर और मुरैना जिलों से प्रवाहित होते हुए अंततः चंबल नदी में समाहित हो जाती है।
- कूनो नदी का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा अकेले गुना जिले के अंतर्गत आता है।
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रसिद्ध कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) के ठीक मध्य से होकर बहती है, जिसे इस नेशनल पार्क की ‘लाइफ-लाइन’ या जीवनरेखा का दर्जा प्राप्त है।
- ऐसे में उद्गम स्थल पर किए गए सुधार कार्य पूरी नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेंगे।
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जनता के बीच पहुंचे सिंधिया, सुनीं समस्याएं
इस विकासपरक कार्यक्रम से पहले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक जनसुनवाई सत्र का भी आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के नागरिकों से मुलाकात की और उनकी विभिन्न समस्याओं व शिकायतों को बेहद गंभीरता से सुना। मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को आम जनता की दिक्कतों का तुरंत और स्थायी समाधान निकालने के कड़े निर्देश जारी किए।
