स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्ति के बाद भी जीपीएफ की लगभग 3.27 लाख रुपये की राशि का भुगतान नहीं हुआ। कई बार अभ्यावेदन देने के बावजूद विभाग ने कोई निर्ण…और पढ़ें

HighLights
- डिंडौरी के सेवानिवृत्त कर्मचारी की गुहार पर कोर्ट का हस्तक्षेप
- आदेश पारित कर परिणाम भी याचिकाकर्ता को सूचित किया जाए
- जमा-पूंजी के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने सेवानिवृत्ति के बाद भी अपनी ही जमा-पूंजी के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर डिंडौरी निवासी जितेंद्र कुमार साहू के मामले में प्रशासनिक उदासीनता पर हस्तक्षेप किया है।
संबंधित सक्षम प्राधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं
कोर्ट ने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता के लंबित अभ्यावेदन पर 30 दिनों के भीतर विधि के अनुरूप कारणयुक्त आदेश पारित कर उसका परिणाम भी याचिकाकर्ता को सूचित किया जाए।
अधिवक्ता अक्षय नामदेव ने दलील दी
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अक्षय नामदेव ने दलील दी कि स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्ति के बाद भी जीपीएफ की लगभग 3.27 लाख रुपये की राशि का भुगतान नहीं हुआ। कई बार अभ्यावेदन देने के बावजूद विभाग ने कोई निर्णय नहीं लिया।
प्रतीक्षा कराना न केवल अनुचित है, प्रशासनिक निष्क्रियता
वर्षों की सेवा के बाद कर्मचारी को उसकी वैधानिक राशि के लिए प्रतीक्षा कराना न केवल अनुचित है, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता का उदाहरण भी है।
निराकरण करने का आदेश और याचिका का पटाक्षेप
सुनवाई के दौरान राज्य शासन पक्ष ने लंबित अभ्यावेदन पर निर्णय कराने की मांग का विरोध नहीं किया। इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना सक्षम प्राधिकारी को 30 दिन के भीतर अभ्यावेदन का निराकरण करने का आदेश दिया और याचिका का पटाक्षेप कर दिया।
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