सुरेन्द्र दुबे, नईदुनिया जबलपुर। नर्मदा के बरगी बांध में हुए रूह कपा देने वाले क्रूज हादसे ने अंतर्देशीय जल परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है। इस बीच अंतर्देशीय जलयान अधिनियम, 2021 के प्रविधान स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि भविष्य में जल परिवहन केवल संचालन का विषय नहीं रहेगा, बल्कि वह कठोर वैधानिक अनुशासन और तकनीकी परीक्षणों के दायरे में होगा।
बरगी जैसे विशाल जलाशयों के संदर्भ में यह व्यवस्था विशेष महत्व
दरअसल, कानून का मूल सिद्धांत है कि किसी जलयान की सुरक्षा केवल उसकी बनावट या इंजन क्षमता से नहीं आंकी जा सकती। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि वह किस प्रकार के जलक्षेत्र में संचालित हो रहा है। बरगी जैसे विशाल जलाशयों के संदर्भ में यह व्यवस्था विशेष महत्व रखती है।
सतह पर दिखने वाली शांति हमेशा सुरक्षा की गारंटी नहीं होती
बरगी हादसे के बाद सबसे बड़ा सबक यही है कि जलाशय की सतह पर दिखने वाली शांति हमेशा सुरक्षा की गारंटी नहीं होती। कानून ने अब इस भ्रम को तोड़ते हुए स्पष्ट कर दिया है कि लहरों पर केवल जलयान नहीं, सुरक्षा मानकों का अनुशासन भी चलेगा।
लहरों के आधार पर तय होंगे संचालन क्षेत्र
अधिनियम के तहत राज्य सरकारें अंतर्देशीय जलक्षेत्रों को लहरों की अधिकतम ऊंचाई के आधार पर तीन जोन में अधिसूचित कर सकती हैं :
- जोन-1 : अधिकतम 2 मीटर लहर ऊंचाई
- जोन-2 : अधिकतम 1.2 मीटर लहर ऊंचाई
- जोन-3 : अधिकतम 0.6 मीटर लहर ऊंचाई
दुर्घटना-निवारण का वैज्ञानिक ढांचा
हाई कोर्ट के विधि विशेषज्ञों के अनुसार यह वर्गीकरण केवल प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि दुर्घटना-निवारण का वैज्ञानिक ढांचा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जलयान उसी जलक्षेत्र में संचालित हो, जिसके लिए वह सुरक्षित रूप से सक्षम है।
सर्टिफिकेट आफ सर्वे बनेगा सुरक्षा की कुंजी
नए कानून के अनुसार किसी भी यांत्रिक जलयान का संचालन वैध सर्टिफिकेट ऑफ सर्वे के बिना नहीं किया जा सकेगा। इस प्रमाणपत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख होगा कि संबंधित जलयान किस जोन में संचालन के लिए उपयुक्त है। अर्थात कोई क्रूज, नाव या अन्य जलयान अपनी स्वीकृत क्षमता से अधिक जोखिम वाले क्षेत्र में नहीं उतारा जा सकेगा।
बरगी हादसे ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि जल परिवहन में जोखिम केवल जलयान से नहीं, जलक्षेत्र की परिस्थितियों से भी पैदा होता है। अंतर्देशीय जलयान अधिनियम इसी जोखिम को नियंत्रित करने का प्रयास है, जहां सुरक्षा का मूल्यांकन मशीन और परिवेश-दोनों की संयुक्त जांच से होगा।
न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी, चेयरमैन एकल जांच आयोग
पंजीयन पर्याप्त नहीं, फिटनेस भी जरूरी
अधिनियम ने यह धारणा बदल दी है कि केवल पंजीयन ही संचालन का आधार है। अब जलयान को यह भी सिद्ध करना होगा कि वह निर्धारित जलक्षेत्र की परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है। सड़क परिवहन में फिटनेस प्रमाणपत्र जिस प्रकार सुरक्षा का आधार है, उसी प्रकार जल परिवहन में सर्वे प्रमाणपत्र की भूमिका होगी।
बरगी जैसे जलाशयों के लिए बढ़ी प्रासंगिकता
मध्य प्रदेश में बरगी, तवा, इंदिरा सागर और गांधी सागर जैसे विशाल जलाशयों में पर्यटन गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में जोन आधारित संचालन व्यवस्था न केवल सुरक्षा मानकों को मजबूत करेगी, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में जवाबदेही भी तय करने में सहायक होगी।
