हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक के विरुद्ध दायर मानहानि संबंधी याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया है। …और पढ़ें

HighLights
- जस्टिस विशाल मिश्रा ने विधायक संजय पाठक मानहानि केस से खुद को अलग किया
- विधायक ने पहले जज से संपर्क का प्रयास किया था, जिससे अवमानना केस लंबित है
- याचिकाकर्ता ने विधायक पर झूठे आरोप लगाने और एफआईआर न होने का दावा किया
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक के विरुद्ध दायर मानहानि संबंधी याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया है। कटनी के पूर्व आर्म्स डीलर नाजिम खान की याचिका शुक्रवार को एकलपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए लगी थी, लेकिन न्यायमूर्ति मिश्रा ने प्रकरण को ऐसी न्यायपीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए, जिसमें वे सदस्य न हों।
उल्लेखनीय है कि विधायक संजय पाठक से जुड़े एक अन्य मामले में भी जस्टिस मिश्रा पहले स्वयं को अलग कर चुके हैं। सितंबर, 2025 में पारित आदेश में उन्होंने उल्लेख किया था कि विधायक द्वारा उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने न्यायपालिका की शुचिता के मद्देनजर विधायक के विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्यवाही दर्ज करने के आदेश दिए थे। वह मामला अभी लंबित है।
याचिका में विधायक पर मानहानिकारक आरोपों का दावा
वर्तमान याचिका में नाजिम खान ने आरोप लगाया है कि विधायक संजय पाठक ने अक्टूबर, 2025 में इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित एक साक्षात्कार में उनके विरुद्ध झूठे व मानहानिकारक आरोप लगाए। याचिकाकर्ता के अनुसार विधायक ने सार्वजनिक रूप से 14 हजार गोलियां गायब होने, अवैध हथियारों की बिक्री तथा आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के हथियार लाइसेंस बनवाने जैसे आरोप लगाए थे। इससे पूर्व उन्होंने विधायक को एक करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भी भेजा था।
यह भी पढ़ें- भोपाल में बड़ी साइबर ठगी… GAIL के रिटायर्ड अफसर से ₹28.84 लाख की धोखाधड़ी, नकली IPO और ऐप से लगाया कूट चूना
पुलिस निष्क्रियता का आरोप
याचिका में कहा गया है कि शिकायतों के बावजूद पुलिस ने न तो एफआईआर दर्ज की और न ही आरोपों की जांच की। इसी आधार पर हाई कोर्ट से विधायक के विरुद्ध अपराध दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की गई है। अब मामले की सुनवाई आगामी सप्ताह किसी अन्य न्यायपीठ के समक्ष होने की संभावना है।
