हाई कोर्ट से तेरह साल तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद एक पूर्व मेडिकल छात्रा को आखिरकार राहत मिल गई।

HighLights
- 2013 में निरस्त किया गया प्रवेश बहाल कर दिया
- राज्य कोटे में मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला
- अधिकारी की गलती का खामियाजा छात्रा नहीं भुगतेगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपु। हाई कोर्ट से तेरह साल तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद एक पूर्व मेडिकल छात्रा को आखिरकार राहत मिल गई। कोर्ट ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर की पूर्व एमबीबीएस छात्रा शैलजा पांडे का वर्ष 2013 में निरस्त किया गया प्रवेश बहाल कर दिया है।
कोर्ट ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को उन्हें एमबीबीएस की डिग्री जारी करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि चिकित्सा व्यवसाय शुरू करने से पहले उन्हें राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के समक्ष निर्धारित परीक्षा देनी होगी।
राज्य कोटे में मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मामले में यह फैसला सुनाया। अधारताल निवासी शैलजा ने वर्ष 2005 में मध्य प्रदेश से 12वीं उत्तीर्ण की थी। वर्ष 2010 में पीएमटी के माध्यम से राज्य कोटे में मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला।
उन्होंने एमबीबीएस की प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण कीं और पाठ्यक्रम भी पूरा कर लिया। इसके बाद 13 जून, 2013 को मूल निवास प्रमाण पत्र से जुड़े नियम का हवाला देकर उनका प्रवेश रद्द कर दिया गया।
सक्षम अधिकारी से नियम की व्याख्या में गलती हुई
उन्होंने उसी वर्ष हाई कोर्ट की शरण ली। छात्रा की ओर से अधिवक्ता नीलेश कुमार जैन ने पक्ष रखा। कोर्ट ने माना कि छात्रा ने कोई तथ्य नहीं छिपाया और न ही धोखाधड़ी की। मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने में सक्षम अधिकारी से नियम की व्याख्या में गलती हुई थी।
