लगभग दो दशक पुरानी बहादुरी की एक मिसाल को आखिरकार न्याय दिलाते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। …और पढ़ें

HighLights
- 200 फीट गहरी खाई में उतरी बहादुरी को मिला न्याय
- स्क्रीनिंग कमेटी के फैसले को बताया मनमाना
- 60 दिन में वर्ष 2005 से लाभ देने के आदेश
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने अपने एक आदेश में बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक ओर प्रशासन टाइपिंग प्रतियोगिता जीतने जैसी उपलब्धि को असाधारण योग्यता का आधार मानता है।
याचिकाकर्ता के पक्ष में राहत प्रदान की
दूसरी ओर जान जोखिम में डालकर बड़ी आपदा टालने वाले कृत्य को सामान्य ड्यूटी बताकर खारिज कर देता है। हाई कोर्ट ने इसे मनमाना निर्णय मानते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में राहत प्रदान की।
वंचित करना पूरी तरह अतार्किक और मनमाना
हाई कोर्ट ने कहा है कि प्रशासनिक निर्णयों की न्यायिक समीक्षा का दायरा भले सीमित हो, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि मनमानी को न्यायिक जांच से छूट मिल जाए।
प्रमोशन का लाभ 60 दिनों के भीतर प्रदान करें
कोर्ट ने पाया कि जिस पुलिस अधिकारी ने अपनी जान जोखिम में डालकर 200 फीट गहरी खाई में उतरकर दो लोगों की जान बचाई, उसे आउट आफ टर्न प्रमोशन से वंचित करना पूरी तरह अतार्किक और मनमाना था। कोर्ट ने इंद्रमणि पटेल को वर्ष 2005 से आउट आफ टर्न प्रमोशन का लाभ 60 दिनों के भीतर प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
एक पेड़ के सहारे लगभग 200 फीट ऊपर लटक गया
याचिका के अनुसार वर्ष 2004 में इंद्रमणि पटेल इंदौर जिले के सिमरोल थाने में थाना प्रभारी के रूप में पदस्थ थे। 22 अप्रैल की रात भारूघाट में ईंटों से भरा एक ट्रक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गया और एक पेड़ के सहारे लगभग 200 फीट ऊपर लटक गया।
चालक और परिचालक मदद के लिए पुकार रहे थे
ट्रक में फंसे चालक और परिचालक मदद के लिए पुकार रहे थे। जब पेशेवर क्रेन आपरेटर भी नीचे उतरने को तैयार नहीं हुए, तब पटेल स्वयं रस्सी के सहारे खाई में उतरे। उन्होंने दोनों की जान बचाई तथा भारी ट्रक को पेड़ से बांधकर और नीचे गिरने से रोका, जिससे संभावित बड़ी दुर्घटना भी टल गई।
कलेक्टर ने प्रशस्ति-पत्र और शील्ड प्रदान की
इस साहसिक कार्य के लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर सम्मानित किया गया। गणतंत्र दिवस पर कलेक्टर ने प्रशस्ति-पत्र और शील्ड प्रदान की। पुलिस अधीक्षक से लेकर पुलिस महानिरीक्षक तक सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें पुलिस रेगुलेशन के तहत आउट आफ टर्न प्रमोशन देने की सिफारिश की, लेकिन स्क्रीनिंग कमेटी ने प्रस्ताव खारिज कर केवल पांच हजार रुपये का नकद पुरस्कार दे दिया।
