नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। दिनभर चले अढाई कोस वाली कहावत इंदौर नगर निगम पर सटीक बैठ रही है। नगर निगम नागरिकों को सरपट सड़कें और शुद्ध जल का सपना दिखा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि आज भी शहर के 25 प्रतिशत हिस्से में नर्मदा लाइन नहीं है।
शहर की ज्यादातर सड़कें खोदी पड़ी हैं। कहीं ड्रेनेज के नाम पर तो कहीं पीने के पाइप बिछाने के नाम पर सड़कों को खोदा गया है। कई जगह लाइन बिछाने का काम पूरा होने के बाद रेस्टोरेशन तक नहीं हुआ है। केंद्र शासन की आर्थिक मदद से तैयार की जा रहीं मास्टर प्लान की 23 सड़कों का काम अब भी अधूरा है।
कुछ सड़कों का तो काम अब तक शुरू नहीं हुआ। जहां शुरु हो गया वहां काम की गति इतनी धीमी है कि सिंहस्थ तक इनके पूरा होने की उम्मींद ही नहीं है। वर्षाकाल में नागरिकों को होने वाली परेशानी के प्रति नगर निगम कितना सजग है यह इसी से स्पष्ट हो रहा है कि जिन सड़कों के चौड़ीकरण के लिए नागरिक खुद अपने आशियाने तोड़ रहे हैं उन सड़कों से नगर निगम मलबा तक नहीं हटा रहा।
थोड़ी सी वर्षा में ही इन क्षेत्रों में कीचड़ की स्थिति बन जाएगी। छह माह पहले जिस भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से 36 मौत हुई थी, उसका एक बड़ा हिस्सा आज भी टैंकरों के भरोसे है। नईदुनिया ने मानसून आडिट के माध्यम से नईदुनिया के उन कार्यों का आंकलन किया जिन्हें वर्षाकाल से पहले निगम को पूरा करना था।
सड़कों की स्थिति और सुधार कार्य
शहर में सड़कों की स्थिति में पिछले कुछ समय में सुधार आया है। सड़कों के गड्ढों को पेचवर्क कर बंद किया गया है। मानसून की तैयारी नजर आ रही है। बावजूद इसके सुधार की गुंजाइश है। कुछ जगह पेचवर्क वर्षा शुरू होने से पहले ही उखड़ने लगा है। निगम का दावा था कि वर्षाकाल में भी पेचवर्क हो सकेगा, इसके लिए दो मशीने भी शहर में आई थीं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
मास्टर प्लान की सड़कों की स्थिति
शहर में मास्टर प्लान की 23 सड़कें बनना हैं। वर्तमान में सिर्फ 12 सड़कों का काम चल रहा है। काम की गति अत्यंत धीमी है। सुभाष मार्ग से कंडीलपुरा होते हुए इंदौर वायर फैक्ट्री सहित कई सड़कें हैं जहां अब तक काम शुरु होना तो दूर बाधाएं तक नहीं हटाई गईं। जिन जगह पर बाधा हटाई जा चुकी है वहां मलबा पड़ा हुआ है। नगर निगम को सिंहस्थ 2028 से पहले मास्टर प्लान की सड़कों का काम पूरा करना है। केंद्र शासन ने निगम को 468 करोड़ रुपये की राशि इस काम के लिए आवंटित भी कर दी है। बावजूद इसके काम तेजी से नहीं हो रहा।
जर्जर मकानों के खिलाफ कार्रवाई
शहर में जर्जर मकानों की संख्या 100 के आसपास हैं। इनमें से ज्यादातर मकान सघन रहवासी क्षेत्रों में हैं। वर्षाकाल में इनके भरभराकर गिरने की आशंका बहुत होती है। नगर निगम इन जर्जर मकानों को जमींदोज करने के बजाय सिर्फ नोटिस देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है। इन जर्जर मकानों की वजह से दुर्घटना की आशंका होती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि जर्जर मकानों की सूची में कौन सा मकान शामिल होगा और कौनसा नहीं इसे लेकर कोई स्पष्ट नीति भी नहीं है। निगम वर्षाकाल से पहले इक्का-दुक्का मकान हटाने की कार्रवाई कर देता है, जबकि कार्रवाई पूरे साल जारी रहना चाहिए।
सार्वजनिक स्थानों से अतिक्रमण हटाना
नगर निगम हर साल वर्षाकाल से पहले सार्वजनिक स्थानों से अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाता है, ताकि वर्षाकाल में शहर की सड़कों पर यातायात निर्बाध रूप से निकल सके, लेकिन इस साल अब तक ऐसी कोई मुहिम या अभियान नगर निगम ने शुरू नहीं किया। इक्का-दुक्का जगह कार्रवाई की भी है तो वह सिर्फ खानापूर्ति होकर रह गई। हालत यह है कि शहर में शायद ही कोई सड़क होगी जिस पर अतिक्रमण न हो। अतिक्रमण को लेकर नगर निगम कितना गंभीर है यह इसी से दिख रहा कि निगम मुख्यालय से कुछ कदम की दूरी पर चिकमंगलूर चौराहा पर दुकानों के बाहर 15-20 फीट तक अवैध कब्जा है।
शुद्ध जल की उपलब्धता
पूरे शहर में शुद्ध जल आज भी उपलब्ध नहीं हो सका है। अमृत 2.0 के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में लाइन बिछाने का काम चल रहा है, लेकिन दूषित पानी आने की समस्या अाज भी बनी हुई है। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड से सबक लेने के बजाय लापरवाही जारी है। शहर के ज्यादातर क्षेत्रों में शिकायत है कि नल में कुछ देर गंदा पानी आता है। वर्षाकाल में यह समस्या बढ़ जाती है। हर साल वर्षाकाल से पहले निगम लाइनों को सुधारने का काम करता है, लेकिन इस वर्ष ऐसा नजर नहीं आ रहा।
इंदौर में लवकुश चौराहे से उज्जैन रोड जाना बना मुसीबत, गड्ढे-जाम से जनता बेहाल
