उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इलाकों जैसे रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में वर्षा होने की उम्मीद है। फिलहाल अगले 24 घंटों में मौसम में किसी बड़े बदलाव क…और पढ़ें

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून के पीक सीजन में वर्षा पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। पिछले दो दिनों से पूरे प्रदेश में कहीं भी बारिश की एक बूंद तक नहीं गिरी है। जानकारी के अनुसार राज्य में आखिरी बार अच्छी बारिश 11 जुलाई को उत्तर-पूर्वी इलाकों में हुई थी। इसके बाद 12 जुलाई को केवल बूंदाबांदी दर्ज की गई, जबकि 13 और 14 जुलाई को पूरा प्रदेश सूखा रहा।
औसत वर्षा के ग्राफ में गिरावट
बारिश न होने से 1 जून से 14 जुलाई तक का औसत वर्षा का ग्राफ गिरकर 7 प्रतिशत कम पर आ गया है। सबसे खराब स्थिति पूर्वी मध्य प्रदेश की है, जहां औसत से 21 फीसद कम वर्षा होने के कारण सूखे जैसे हालात बन गए हैं। वहीं पश्चिमी इलाकों में औसत से 6 प्रतिशत वर्षा अधिक है, लेकिन पानी न गिरने से यह ग्राफ भी तेजी से नीचे खिसक रहा है।
तपने लगीं रातें और दिन, भोपाल-ग्वालियर में पारा उछला
बारिश न होने से प्रदेश के दिन और रात के तापमान में मंगलवार को बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राजधानी भोपाल का पारा सोमवार को 32.8 डिग्री था, जो मंगलवार को 1.9 डिग्री बढ़कर 33.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं ग्वालियर में पारा धीरे-धीरे 40 डिग्री के करीब पहुंच रहा है, मंगलवार को यहां तापमान 37.4 डिग्री दर्ज हुआ, जो सामान्य से 1.8 डिग्री अधिक है। जबलपुर में 2.7 डिग्री के उछाल के साथ तापमान 34.6 डिग्री और इंदौर में 2.2 डिग्री की बढ़त के साथ पारा 32.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
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17 जुलाई से मिल सकती है कुछ राहत
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार वर्तमान में मानसूनी द्रोणिका जम्मू की तरफ खिसक गई है। हवा के ऊपरी भाग में तीन चक्रवात सक्रिय हैं, जिनकी वजह से नमी आ रही हैं। 16 जुलाई तक प्रदेश में अच्छी वर्षा की संभावना बेहद कम है। हालांकि 17 जुलाई से मौसम में थोड़ा बदलाव आ सकता है, जिससे उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इलाकों जैसे रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में वर्षा होने की उम्मीद है। फिलहाल अगले 24 घंटों में मौसम में किसी बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं।
