नईदुनिया झाबुआ/मेघनगर। मुंबई मंडल के भिलाड-बोरीवली खंड में भारी वर्षा के कारण जलभराव होने से रेल परिचालन चरमरा गया। रतलाम मंडल से गुजरने वाली कई ट्रेनें निरस्त एवं मार्ग परिवर्तित की गईं, लेकिन सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ी मेघनगर स्टेशन पर खड़ी उदयपुर-बांद्रा एक्सप्रेस के यात्रियों को।
सुबह 5.20 बजे प्लेटफार्म क्रमांक 3 पर आकर रुकी यह ट्रेन खबर लिखने तक यानी दोपहर तीन बजे तक वहीं की वहीं पड़ी रही, जिससे सैकड़ों यात्रियों को भूख, प्यास, गर्मी के साथ बारिश की बौछार और मानसिक यातना का सामना करना पड़ा।
स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव और यात्रियों की बेबसी
मेघनगर स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक 2 और 3 पर न तो पेयजल की व्यवस्था थी और न ही शौचालय की सुविधा। बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे सबसे अधिक संकट में थे। रेलवे की ओर से कोई सूचना, कोई हेल्प डेस्क, कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई थी। बस एक अनिश्चितता का लंबा सिलसिला चलता रहा।
कई यात्रियों ने हारकर निजी वाहनों से गंतव्य या घर की ओर रुख किया, जबकि लंबी दूरी से आने वाले और लंबी दूरी की ओर गंतव्य वाले कई यात्री मजबूरन वहीं ठहरे रहे।
सामाजिक संस्थाओं और जैन समाज ने बढ़ाया मदद का हाथ
इस भयावह स्थिति की खबर लगते ही स्थानीय जैन समाज के कई कार्यकर्ताओं ने स्टेशन पर पहुंचकर यात्रियों के लिए गरमागरम दाल-बाफले, सब्जी और पूरी की व्यवस्था की, साथ ही शुद्ध आरओ का जल भी उपलब्ध कराया। अन्य कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा भी केले, बिस्किट, पानी आदि वितरित किया गया।
भूखे-प्यासे यात्रियों को गरम भोजन और ठंडा पानी मिलने से जहां उनके चेहरे पर कुछ राहत दिखी, वहीं इस सहयोग ने रेलवे प्रशासन की पूर्ण उदासीनता को और भी उजागर कर दिया। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता देकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि जहाँ सरकारी तंत्र विफल रहता है, वहां आम नागरिक बढ़कर आगे आते हैं।
रेलवे की विफलता पर सीधी बातें
मेघनगर स्टेशन रेलवे को करोड़ों रुपये का राजस्व हर माह देता है, जवाब में रेलवे ने यहाँ पीने के पानी और शौचालय तक की मूलभूत सुविधा नहीं दी। 10 घंटे तक फंसी ट्रेन की कोई घोषणा या हेल्पलाइन अपडेट जारी नहीं किया गया, जबकि यात्रियों में बीमार, महिलाएं, बुजुर्ग और शिशु भी शामिल थे।
रेलवे को करोड़ों का राजस्व देने वाले इस स्टेशन पर आपातकालीन दवा, पानी या एम्बुलेंस जैसी कोई भी गाइडलाइन लागू नहीं दिखी। स्थानीय जैन समाज के साथ अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जो राहत पहुंचाई, वही इस सरकारी तंत्र पर शर्मसार करने वाला सबूत बन गया। आपदा प्रबंधन में रेलवे पूरी तरह अनुपस्थित रहा।
परेशान लोगों ने बखान किया अपना दर्द
- बांद्रा जाने वाली 35 वर्षीया सुनीता उपाध्याय ने अपना दर्द बताते हुए कहा कि मेरी 3 साल की बेटी आरोही बुखार से तप रही है, सुबह 6 बजे से दूध नहीं मिला। न कोई बताने वाला, न कोई सुनने वाला। मैं अकेली हूं, सामान संभालूं या बच्ची।
हवाई अड्डे पर सब सुविधाएं, यहां क्यों नहीं?
लोगों का कहना है कि हवाई अड्डे पर छह घंटे की देरी पर यात्री को मुफ्त भोजन, पेयजल, वाई-फाई, लाउंज में बैठने की सुविधा और टिकट रिफंड का विकल्प मिल जाता है। एयरलाइन अपने यात्री को मेहमान मानती है। लेकिन मेघनगर स्टेशन पर 10 घंटे फंसे रेल यात्रियों को न रिफंड मिला, न भोजन, न पानी, न कोई सूचना। रेलवे ने उन्हें ‘मजबूर सवार’ समझा।
यह भी पढ़ें- झाबुआ में 6 घंटे से खड़ी रही ट्रेन… यात्रियों ने पटरी पर लेटकर दिया धरना, कहा- ‘लोकल गाड़ियां निकाल रहे’
