शनिवार को नवजात का शव वार्ड के बाहर डस्टबिन में कचरे में मिला। इस संबंध में स्वजन का आरोप है कि सोमवार को जन्म के बाद से यह भी चिकित्सकों ने नहीं बताय…और पढ़ें

HighLights
- 5 जुलाई को मंडला से परिवार मेडिकल पहुंचा था।
- 6 जुलाई को वहां गायनिक वार्ड में महिला भर्ती।
- 5 दिन बाद नवजात जब मिला तो डस्टबिन में था।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। प्रदेश के सबसे बड़े और पुराने नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में शनिवार को सनसनीखेज चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मंडला का दंपती रविवार को प्रसव पीड़ा के बाद नगर आई। सोमवार को मेडिकल कालेज अस्पताल में प्रसव पीड़ा के बाद महिला ने नवजात शिशु को जन्म दिया।
शनिवार को नवजात का शव वार्ड के बाहर डस्टबिन में कचरे में मिला। इस संबंध में स्वजन का आरोप है कि सोमवार को जन्म के बाद से यह भी चिकित्सकों ने नहीं बताया कि नवजात बच्ची हुई की बेटा।
इस पूरे मामले में मेडिकल कालेज प्रशासन सवालों के घेरे में है और शीर्ष अधिकारी जवाब से बचते दिखे। करीब छह घंटे हंगामा मेडिकल के गायनिक वार्ड के बाहर चलता रहा। इस बीच पोस्टमार्टम रविवार को होगा।
ऐसे घटनाक्रम प्रकाश में आया
- मंडला जिले के मकरी गांव का परिवार रविवार को डिलेवरी के लिए पत्नी को लेकर जबलपुर पहुंचा था।
- परिवार की बहू को मेडिकलअस्पताल के प्रसव पीड़ा के बाद गायनिक वार्ड में भर्ती किया गया था।
- जहां युवती ने सोमवार को नवजात को जन्म दिया।
- स्वजन ने नईदुनिया से जानकारी साझा करते हुए बताया कि सोमवार को नवजात के जन्म के बाद से लेकर शनिवार तक हम यही पूछते रहे कि बेटी हुई या बेटा लेकिन Doctor कुछ भी बताने से इंकार करते रहे।
- आखिरकार शनिवार की दोपहर नवजात का मृत शव वार्ड के पास रखे डस्टबिन के कचरे में मिला।
समय पूर्व हुई डिलेवरी
चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ की मानें तो समय पूर्व महिला की डिलेवरी करानी पड़ी। नवजात साढ़े छह माह का ही था। जिसके कारण माना जा रहा है कि वह पूर्ण विकसित नहीं था अभी भूर्ण ही था। चूंकि युवती के पेट में पानी भर रहा था और उसे तकलीफ थी इस कारण सिजेरियन डिलेवरी हुई और नवजात मृत ही पैदा हुआ।
वार्ड से डस्टबिन में कैसे पहुंचा नवजात का शव
गायनिक वार्ड से डस्टबिन में कैसे पहुंचा नवजात का शव इसका जवाब मेडिकल अस्पताल प्रशासन के पास नहीं है। सभी बचते रहे। स्वजन के अनुसार हमने घर से लाए जिस कपड़े में नवजात शिशु को लपेटा था उसी से उसकी पहचान की।
अनेक सवाल जिसके उत्तर अब तक नहीं मिले
-आखिर नवजात मृत पैदा हुआ तो अब तक जानकारी क्यों छिपाई गई
-नवजात की लिंग संबंधी जानकारी भी अस्पताल ने स्वजन को क्यों नहीं दी
-गायनिक वार्ड से नवजात डस्टबिन तक कैसे पहुंच गया
यह कहना ठीक नहीं है कि प्रसूता व नवजात के उपचार में कोई कोताही बरती गई। बेहतर उपचार का प्रयास किया गया। स्वजन का आरोप गलत है कि डस्टबिन में बच्चा मिला।
अरविंद शर्मा, अधीक्षक मेडिकल अस्पताल जबलपुर
चिकित्सकों ने अपना कार्य हर रोज की तरह अच्छे ढंग से किया और इस पूरे घटनाक्रम की सूचना भी हमने तत्काल क्षेत्रीय थाना पुलिस को दी थी।
नवनीत सक्सेना, डीन नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल
