महत्वपूर्ण पदस्थापन, प्रमुख समितियों, विशेष परियोजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कंपनी कैडर की भागीदारी लगातार बढ़ाई गई। ऐसे में पदोन्नति प्रक्रिया…और पढ़ें

HighLights
- कंपनी कैडर के अधिकारी अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं
- पदोन्नति प्रक्रिया ने वर्षों पुराने कैडर विवाद को फिर हवा दी
- पदोन्नति में आरक्षण लागू करने की मांग पर अड़ा हुआ
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (ट्रांसको) में चल रही पदोन्नति प्रक्रिया ने वर्षों पुराने कैडर विवाद को फिर हवा दे दी है।
कंपनी के भीतर तीन अलग-अलग गुट सक्रिय
प्रमोशन को लेकर कंपनी के भीतर तीन अलग-अलग गुट सक्रिय हो गए हैं। एक ओर बोर्ड कैडर के अभियंता हैं, दूसरी ओर कंपनी कैडर के अधिकारी अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं, जबकि तीसरा पक्ष आरक्षित वर्ग का है, जो पदोन्नति में आरक्षण लागू करने की मांग पर अड़ा हुआ है।
मुख्य धारा में लाने पर विशेष जोर
सूत्रों के अनुसार, कंपनी गठन के बाद से ट्रांसको प्रबंधन ने कंपनी कैडर के अभियंताओं को नेतृत्व की मुख्य धारा में लाने पर विशेष जोर दिया।
सेवा और वरिष्ठता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
अब पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू होने के साथ यही वर्ग सबसे अधिक मुखर नजर आ रहा है। दूसरी ओर बोर्ड कैडर के अभियंताओं का कहना है कि वर्षों की सेवा और वरिष्ठता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
स्थापित नियमों को अलग नजरिये से नहीं देखना चाहिए
उनका तर्क है कि वर्ष 2001 में मध्यप्रदेश विद्युत मंडल के पुनर्गठन के दौरान सरकार ने बोर्ड कैडर से जुड़े नियम और नीतियां स्पष्ट कर दी थीं। ऐसे में कंपनी कैडर को स्थापित नियमों को अलग नजरिये से नहीं देखना चाहिए।
तीनों पक्ष अपने-अपने हितों को लेकर सक्रिय
आरक्षित वर्ग के अभियंताओं ने भी पदोन्नति में आरक्षण लागू किए बिना प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। इससे ट्रांसको के भीतर तीनों पक्ष अपने-अपने हितों को लेकर सक्रिय हो गए हैं।
कई बार तीखी बहस और नोकझोंक भी चर्चा का विषय
सूत्र बताते हैं कि यह विवाद अब केवल ज्ञापनों और बैठकों तक सीमित नहीं है। मुख्यालय में मानव संसाधन और प्रशासनिक मामलों को लेकर कई बार तीखी बहस और नोकझोंक भी चर्चा का विषय बनी है।
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