CG News: इंटरनेट मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार की गई मगरमच्छ की फर्जी तस्वीर वायरल कर लोगों में भय फैलाना एक युवक को महंगा पड…और पढ़ें

HighLights
- छत्तीसगढ़ के रामानुजनगर क्षेत्र के ग्राम केशवपुर की घटना
- टीम की गहन जांच में मगरमच्छ के होने के प्रमाण नहीं मिले
- युवक ने स्वीकारा, मगरमच्छ का फोटो जोड़कर फर्जी तैयार की थी
नईदुनिया न्यूज, सूरजपुर। इंटरनेट मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार की गई मगरमच्छ की फर्जी तस्वीर वायरल कर लोगों में भय फैलाना एक युवक को महंगा पड़ गया। जिले के रामानुजनगर क्षेत्र के ग्राम केशवपुर में तालाब में मगरमच्छ होने की अफवाह फैलाने के मामले में वन विभाग ने वैधानिक कार्रवाई करते हुए आरोपित युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
विभाग ने इसे अफवाह फैलाने और शासकीय संसाधनों के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताया है। वन विभाग के अनुसार 23 जुलाई को ग्राम पंचायत केशवपुर के यादवपारा स्थित तालाब में मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना मिली थी।
जांच में मगरमच्छ के होने के प्रमाण नहीं मिले
मगरमच्छ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित प्रजाति है। इसलिए सूचना को गंभीरता से लेते हुए विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और रेस्क्यू दल तत्काल मौके पर पहुंचे। तालाब और आसपास के क्षेत्र की गहन जांच की गई, लेकिन कहीं भी मगरमच्छ के होने के प्रमाण नहीं मिले।
मगरमच्छ का चित्र जोड़कर फर्जी फोटो तैयार की थी
जांच के दौरान ग्राम केशवपुर निवासी बृजलाल यादव ने स्वीकार किया कि उसने तालाब की वास्तविक तस्वीर में एआई तकनीक की सहायता से मगरमच्छ का चित्र जोड़कर फर्जी फोटो तैयार की थी। इसके बाद उसने इसे विभिन्न व्हाट्सएप समूहों में साझा कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और भ्रम का माहौल बन गया।
फर्जी सूचना के कारण वन विभाग को अधिकारियों, कर्मचारियों और रेस्क्यू टीम के साथ मौके पर पहुंचकर जांच करनी पड़ी। विभाग का कहना है कि इससे शासकीय संसाधनों का अनावश्यक उपयोग हुआ और अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित हुए।
अफवाह फैलाने वालों को दी चेतावनी
वन विभाग ने आरोपित बृजलाल यादव के खिलाफ पुलिस थाना रामानुजनगर में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि एआई या अन्य डिजिटल माध्यमों से तैयार भ्रामक फोटो, वीडियो अथवा असत्य सूचनाओं का निर्माण और प्रसार न करें।
यदि कहीं वास्तव में कोई वन्यजीव दिखाई दे तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें और अपुष्ट जानकारी इंटरनेट मीडिया पर साझा करने से बचें।
