डबरा क्षेत्र में अवैध खन मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्ती दिखाई है।

HighLights
- हाई कोर्ट ने लगभग 83 खदानों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है
- पूछा- किसे कहां खदान मिली और कौन कहां काम कर रहा है
- पिछली सुनवाई में 16 खनन पट्टों पर लगाई गई थी रोक
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने डबरा क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अब लगभग 83 खदानों का पूरा रिकार्ड मांगा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरन हाई कोर्ट की युगलपीठ ने कोर्ट में पेश फाइलों का आवलोकन किया। जिसमें पाया कि किस व्यक्ति को कहां खदान स्वीकृत की गई है और वह कहा काम कर रहा है इस बात की कोई व्यवस्थित मैपिंग नहीं है।
न्यायालय ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सभी 83 खदानों की फाइलें कोर्ट में पेश करने की बात कही है साथ ही यह भी कहा है कि जिन खदानों की फाइल कहीं बाहर है उसकी सत्यापित प्रति कोर्ट में पेश करें। अब इस मामले की सुनवाई जुलाई के अंत में होगी।
16 खनन पट्टों की गतिविधियां तत्काल बंद करने के आदेश
बता दें कि बीती सुनवाई पर गुरुवार को हाई कोर्ट ने 16 खनन पट्टों में खनन गतिविधियां तत्काल बंद करने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने डबरा के एसडीओ रूपेश रतन सिंघई द्वारा भ्रामक अनुपालन रिपोर्ट पेश किए जाने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई भी शुरू करने के आदेश दिए।
कारण बताओ नोटिस नौ साल तक लंबित रहे
अकरम खान की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि वर्ष 2017 में जारी कारण बताओ नोटिस करीब नौ साल तक लंबित रहे। करोड़ों रुपये की रॉयल्टी और पेनाल्टी की वसूली नहीं की गई, जबकि कई खनन पट्टों का नवीनीकरण भी कर दिया गया। अदालत ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना।
सुनवाई के दौरान एसडीओ ने स्वीकार किया कि अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने से पहले अधिकांश खदानों का निरीक्षण नहीं किया गया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह या तो गंभीर लापरवाही है या फिर अवैध खनन करने वालों को संरक्षण देने जैसा है।
