नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मझौली स्थित भूमि महिला संगठन के समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र में सामने आए 5100 क्विंटल से अधिक गेहूं घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। प्रारंभिक जांच में रिकॉर्ड और वास्तविक भंडारण में भारी अंतर मिलने के बाद प्रशासन ने अब किसानों से सीधे पूछताछ शुरू करने का निर्णय लिया है।
50 – 60 किसानों को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया
जांच टीम ने खरीदी रिकॉर्ड में दर्ज लगभग 600 किसानों की सूची तैयार की है, जिनके नाम पर समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी दिखाई गई थी। इनमें से करीब 50 – 60 किसानों को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। इन किसानों से पूछताछ हुई।
बिचौलियों का गेहूं किसानों के नाम पर समर्थन मूल्य में खरीदा
प्रशासनिक जांच में पता चला कि व्यापारियों और बिचौलियों का गेहूं किसानों के नाम पर समर्थन मूल्य में खरीदा गया और बाद में रिकॉर्ड में हेराफेरी कर बड़ी मात्रा में अनाज गायब कर दिया गया।
कृषि भूमि और उत्पादन क्षमता उससे मेल नहीं खाती
प्रारंभिक जांच में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां छोटे किसानों के नाम पर असामान्य मात्रा में गेहूं खरीदी दर्ज की गई, जबकि उनकी कृषि भूमि और उत्पादन क्षमता उससे मेल नहीं खाती।
दर्ज गेहूं और वास्तविक भंडारण में भारी अंतर पाया
मामला तब गंभीर हुआ जब भूमि महिला संगठन के खरीदी केंद्र और अन्नपूर्णा वेयरहाउस में स्टॉक सत्यापन के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज गेहूं और वास्तविक भंडारण में भारी अंतर पाया गया। जांच में करीब 5168.70 क्विंटल गेहूं कम मिला, जिसकी कीमत लगभग 1 करोड़ 35 लाख 67 हजार रुपये आंकी गई है।
हजारों क्विंटल गेहूं दर्ज होने के बावजूद वास्तविक स्टॉक कम था
कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच दल ने 27 मई को वेयरहाउस का निरीक्षण किया था। मौके पर पाया गया कि रिकॉर्ड में हजारों क्विंटल गेहूं दर्ज होने के बावजूद वास्तविक स्टॉक कम था।
कई किसानों के दस्तावेज अधूरे पाए गए
जांच रिपोर्ट में खरीदी, परिवहन, बारदाने और एफसीआई को भेजे गए गेहूं के रिकॉर्ड में भी गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। कई किसानों के दस्तावेज अधूरे पाए गए, जबकि कुछ मामलों में परिवहन चालान और किसानों के हस्ताक्षरों पर भी सवाल उठे हैं।
कई लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी गई है
अधिकारियों को संदेह है कि पूरे नेटवर्क के जरिए फर्जी खरीदी दर्शाकर सरकारी राशि और अनाज में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई। प्राथमिक जांच में महिला संगठन अध्यक्ष, खरीदी केंद्र प्रभारी, ऑपरेटर और वेयरहाउस संचालक समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी गई है।
कई अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है
प्रशासन अब इनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की तैयारी में है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों से पूछताछ और दस्तावेजों के मिलान के बाद मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि फर्जी किसान पंजीयन और व्यापारियों के माध्यम से गेहूं खरीदी की पुष्टि होती है तो कई अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। जिले में समर्थन मूल्य खरीदी व्यवस्था पर इस मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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