मानसून से पहले शहर के 642 नालों की तीन-तीन बार सफाई कराने का दावा करने वाले नगर निगम की तैयारियों की शनिवार रात हुई महज आधे घंटे की बारिश ने पोल खोल द…और पढ़ें
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नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मानसून से पहले शहर के 642 नालों की तीन-तीन बार सफाई कराने का दावा करने वाले नगर निगम की तैयारियों की शनिवार रात हुई महज आधे घंटे की बारिश ने पोल खोल दी। निगम जिन नालों को पूरी तरह साफ बताकर अपनी पीठ थपथपा रहा था, वे पहली तेज बारिश में ही जवाब दे गए। नाले उफन पड़े, सड़कें तालाब बन गईं और गंदा पानी लोगों के घरों में घुस गया।
हालात यह रहे कि जिन इलाकों में रातभर लोग पानी निकालने में जुटे रहे, वहां रविवार को निगम की टीम जेसीबी लेकर नाले साफ करने पहुंची। बता दें कि बारिश के दौरान डीआईजी बंगला चौराहा, हमीदिया रोड, गांधी मेडिकल कॉलेज हॉस्टल, शिवनगर और विश्वकर्मा नगर समेत शहर के कई निचले इलाकों में पानी भर गया। कई स्थानों पर नाले ओवरफ्लो हो गए और सड़कें जलमग्न हो गईं।
नगर निगम ने कुछ दिन पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि कहीं नाला चोक मिला तो संबंधित जोन के प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी (एएचओ) पर कार्रवाई होगी, लेकिन पहली ही बारिश में सामने आए हालात ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली स्थिति करोंद के विश्वकर्मा नगर की है। बारिश के बाद रविवार को यहां नाले की सफाई के दौरान जेसीबी मशीन से सीमेंट का बड़ा पाइप निकाला गया, जो नाले के बीचोंबीच फंसा हुआ था और पानी की निकासी रोक रहा था।
गांधी मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में भरा पानी
शनिवार रात हुई बारिश ने गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के सी-ब्लॉक बालक छात्रावास की व्यवस्थाओं की भी पोल खोल दी। हॉस्टल के भूतल पर पानी भर गया, जिसका वीडियो रविवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। खास बात यह है कि इसी हॉस्टल का हाल ही में करीब 3.50 करोड़ रुपये की लागत से नवीनीकरण कराया गया था।
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इसके बावजूद पहली ही बारिश में जलभराव होने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और ड्रेनेज व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रों का कहना है कि बारिश का पानी हॉस्टल के भीतर भरने से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कमरों में रखा सामान भी भीगकर खराब हो गया है।
पहली ही बारिश में ही घर के सामने बनी नाली ओवरफ्लो हो गई और गंदा पानी घर में भर गया। सामान खराब होने से बचाने के लिए बेड, अलमारी और अन्य घरेलू सामान को ईंट और पेवर ब्लॉक रखकर ऊंचा करना पड़ा। इतना ही नहीं, घर की पानी की टंकी में भी नाले का गंदा पानी पहुंच गया, जिससे पेयजल उपयोग लायक नहीं बचा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निगम समय रहते नालों की वास्तविक सफाई और अधूरे निर्माण पूरे कर देता तो पहली बारिश में ही शहर को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। – बालचंद्र हवेलिया, रहवासी, विश्वकर्मा नगर
नगर निगम द्वारा क्षेत्र में कुछ समय पहले ही नाली का निर्माण कराया गया है, लेकिन हमारे घर के पास नाली को अधूरा छोड़ दिया गया है। इस वजह से पानी निकल नहीं पा रहा है। शनिवार रात को हुई बारिश में रसोई तक पानी भर गया था, जिसे बड़ी मशक्कत के बाद निकाला जा सका। नाली के निर्माण के लिए पार्षद से लेकर निगम के अधिकारियों तक से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन निर्माण पूरा नहीं हो सका है, जिसकी वजह से बारिश में हमें परेशानी का सामना करना पड़ता है। – पुष्पा शर्मा, रहवासी, विश्वकर्मा नगर फेज-दो
शहर में जहां-जहां भी समस्या आ रही है, वहां लगातार सुधार कार्य कराया जा रहा है। बारिश के बाद नालों में पानी का बहाव तेज होने से गंदगी बहकर आ गई है, जिसे साफ कराया जा रहा है। हमने आपातकालीन टीम को तैनात कर रखा है। – संस्कृति जैन, आयुक्त, नगर निगम
