यदि अधीनस्थ अधिकारी आदेशों के पालन में लापरवाही बरतते हैं तो उसकी जवाबदेही विभाग के शीर्ष अधिकारियों तक भी तय होगी।

HighLights
- टीकमगढ़ राजस्व प्रकरण में हाई कोर्ट सख्त, दो अधिकारी निलंबित।
- भविष्य में आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश।
- कोर्ट ने कहा जवाबदेही विभाग के शीर्ष अधिकारियों तक भी तय होगी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने अपने एक आदेश में स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना अब केवल निचले स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं मानी जाएगी। यदि अधीनस्थ अधिकारी आदेशों के पालन में लापरवाही बरतते हैं तो उसकी जवाबदेही विभाग के शीर्ष अधिकारियों तक भी तय होगी।
इसी सख्त रुख के तहत टीकमगढ़ के राजस्व प्रकरण से जुड़ी अवमानना याचिका की सुनवाई में न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ के निर्देश पर राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव संजय जैन को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ा। प्रमुख सचिव ने कोर्ट के समक्ष बिना शर्त क्षमा याचना करते हुए अतिरिक्त अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।दरअसल, यह मामला वर्ष 2022 में दायर अवमानना याचिका का है।
राकेश एवं अन्य ने आरोप लगाया था कि 29 सितंबर, 2021 को पारित रिट याचिका क्रमांक 20794/2021 के आदेश का पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ गुलाटी के साथ अधिवक्ता भानु प्रताप यादव ने पैरवी की, जबकि राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एचएस रूपराह व अधिवक्ता पीयूष जैन उपस्थित हुए।
सुनवाई के दौरान शासन ने अदालत को बताया कि नायब तहसीलदार द्वारा 30 जून, 2026 को पारित गलत आदेश को निरस्त कर एक जुलाई, 2026 को राजस्व मंडल के निर्देशों के अनुरूप नया आदेश जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर दिए गए हैं।
शासन ने यह भी स्वीकार किया कि तहसीलदार, नायब तहसीलदार और एसडीएम स्तर पर हुई लापरवाही के कारण आदेश के पालन में अनावश्यक विलंब हुआ। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर, टीकमगढ़ को वरिष्ठ अधिकारियों की जांच समिति गठित कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
कोर्ट को यह भी अवगत कराया गया कि शिब्बू सिंह कसोरिया, नायब तहसीलदार, लिधौरा व संजय दुबे, प्रभारी डिप्टी कलेक्टर व एसडीएम (राजस्व) जतारा, जिला टीकमगढ़ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
दोनों के निलंबन आदेश भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। अपने आदेश में न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने कहा कि प्रमुख सचिव को इसलिए पक्षकार बनाया गया, ताकि उन्हें यह जानकारी रहे कि अधीनस्थ अधिकारी किस प्रकार कार्य कर रहे हैं।
