मामला दहेज हत्या के प्रकरण में दोषसिद्ध रीवा जेल के एक बंदी की अपील से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से कानूनी सहायता मांगे जाने पर कोर्ट ने अ…और पढ़ें

HighLights
- जेल महानिदेशक को शपथपत्र पर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश
- जन भत्ते (डाइट अलाउंस) की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए
- पुलिस से पूछा कि क्या कैदियों के भोजन के लिए अलग से राशि मिलती है
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर । हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने अदालत में पेशी के लिए जेल से लाए जाने वाले कैदियों के भोजन भत्ते (डाइट अलाउंस) की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जेल महानिदेशक से हलफनामे के माध्यम से जवाब तलब
कोर्ट ने जेल महानिदेशक से हलफनामे के माध्यम से जवाब तलब करते हुए इस व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
रीवा जेल के एक बंदी की अपील से जुड़ा मामला
दरअसल, मामला दहेज हत्या के प्रकरण में दोषसिद्ध रीवा जेल के एक बंदी की अपील से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से कानूनी सहायता मांगे जाने पर कोर्ट ने अधिवक्ता रविशंकर पटेल को न्यायालय मित्र नियुक्त किया।
इसी दौरान कोर्ट ने आरोपी को पेशी पर लेकर आए पुलिसकर्मियों से पूछा कि क्या कैदियों के भोजन के लिए अलग से राशि मिलती है।
दैनिक भत्ते से ही कैदी के भोजन का खर्च वहन करना पड़ता है
पुलिसकर्मियों ने बताया कि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। उन्हें मिलने वाले दैनिक भत्ते से ही कैदी के भोजन का खर्च वहन करना पड़ता है।
कैदी पेशी पर रहता है, उस दौरान जेल में भोजन की प्रविष्टि नहीं होती
कोर्ट ने कहा कि जिस अवधि में कैदी पेशी पर रहता है, उस दौरान जेल में उसके भोजन की प्रविष्टि नहीं होती। ऐसे में डाइट अलाउंस की राशि संबंधित पुलिसकर्मियों को दी जा सकती है।
आदेश की प्रति आवश्यक कार्रवाई के लिए जेल महानिदेशक को भेजी
कोर्ट ने इस संबंध में विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए आदेश की प्रति आवश्यक कार्रवाई के लिए जेल महानिदेशक को भेजी है।
