इसी आधार पर कोर्ट ने सागर के पहलवान बब्बा मंदिर को सरकारी नियंत्रण में लेने संबंधी आदेश निरस्त कर मामला पुनर्विचार के लिए संभागायुक्त के पास भेज दिया। …और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अपने एक आदेश में कहा कि किसी मंदिर को शासकीय नियंत्रणाधीन मानने के लिए उसे सरकार से वित्तीय सहायता मिलना आवश्यक है।
इसी आधार पर कोर्ट ने सागर के पहलवान बब्बा मंदिर को सरकारी नियंत्रण में लेने संबंधी आदेश निरस्त कर मामला पुनर्विचार के लिए संभागायुक्त के पास भेज दिया।
मंदिर के संस्थापक रामेश्वर प्रसाद तिवारी की ओर से अधिवक्ता आशीष त्रिवेदी, आनंद शुक्ला व अपूर्व त्रिवेदी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि शासकीय देवस्थान प्रबंध समिति नियम, 2019 के नियम 1(जी) के अनुसार केवल वही मंदिर शासकीय नियंत्रण में आ सकता है, जिसे सरकारी अनुदान प्राप्त हो।
प्रश्नगत मंदिर को कभी कोई शासकीय फंड नहीं मिला। कोर्ट ने पाया कि मंदिर को सरकारी नियंत्रण में लेते समय इस महत्वपूर्ण पहलू पर विचार नहीं किया गया।
इसलिए 2 सितंबर 2024 को पारित संभागायुक्त का आदेश विधिसम्मत नहीं ठहराया जा सकता। हाई कोर्ट ने आदेश निरस्त कर अपील पर सभी पक्षों की दलीलों के आधार पर नए सिरे से निर्णय लेने के निर्देश दिए।
