कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना उपलब्ध परिस्थितियों में जमानत मंजूर की।

HighLights
- आरोपी ट्रायल में नियमित उपस्थित रहेगा
- गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा, कोई अपराध नहीं करेगा
- कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेगा
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार वानी की एकलपीठ के समक्ष सुनवाई में आए कटनी के विजयराघवगढ़ वन परिक्षेत्र के चर्चित चीतल शिकार मामले में वैज्ञानिक जांच ही अभियोजन की सबसे कमजोर कड़ी बन गई।
हाई कोर्ट ने इसे महत्वपूर्ण तथ्य माना
जब एफएसएल पके हुए मांस को चीतल का होने की पुष्टि नहीं कर सकी, तो हाई कोर्ट ने इसे महत्वपूर्ण तथ्य मानते हुए आरोपी को नियमित जमानत दे दी।
विजयराघवगढ़ वन परिक्षेत्र में दर्ज चीतल शिकार प्रकरण
दरअसल, कटनी जिले के विजयराघवगढ़ वन परिक्षेत्र में दर्ज चीतल शिकार प्रकरण में हाई कोर्ट ने आरोपित प्रीतम भूमिया को नियमित जमानत दे दी। कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना उपलब्ध परिस्थितियों में जमानत मंजूर की।
कि वह मांस किस वन्यजीव का है
आवेदक की ओर से अधिवक्ता शांतनु तिवारी ने दलील दी कि वन विभाग ने जिस पके हुए मांस को चीतल का बताकर जब्त किया था, उसकी एफएसएल रिपोर्ट में यह निर्धारित ही नहीं हो सका कि वह मांस किस वन्यजीव का है।
आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर छोड़ा
उन्होंने यह भी बताया कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है, आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और आरोपित एक मार्च, 2026 से न्यायिक अभिरक्षा में है। इन दलीलों पर विचार करते हुए हाई कोर्ट ने आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा समान राशि के एक सक्षम जमानतदार पर रिहा करने का आदेश दिया।
