मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में वर्ष 2019 से लंबित ओबीसी आरक्षण से जुड़े 91 प्रकरणों की सुनवाई के लिए आखिरकार विशेष बेंच का गठन कर दिया गया है।

HighLights
- राज्य शासन का पक्ष सुनने के लिए 16 जून की तारीख तय की थी
- 13 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में नियमित सुनवाई के निर्देश दिए थे
- न्यायमूर्ति आनंद पाठक के साथ विशेष बेंच में नामित किया गया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में वर्ष 2019 से लंबित ओबीसी आरक्षण से जुड़े 91 प्रकरणों की सुनवाई के लिए आखिरकार विशेष बेंच का गठन कर दिया गया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया के अनुमोदन से जारी प्रशासनिक आदेश के अनुसार इन सभी मामलों की सुनवाई अब न्यायमूर्ति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच-दो करेगी।
प्रकरण 13 जुलाई से प्रारंभ होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध किए जाएंगे और 15 जुलाई से नियमित सुनवाई शुरू होने की संभावना है।
राज्य शासन का पक्ष सुनने के लिए 16 जून की तारीख तय की थी
ओबीसी वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 19 फरवरी को विशेष पीठ गठित कर तीन माह के भीतर मामलों के निराकरण का निर्देश दिया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा ने याचिकाकर्ताओं की सुनवाई पूरी कर राज्य शासन का पक्ष सुनने के लिए 16 जून की तारीख तय की थी।
13 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में नियमित सुनवाई के निर्देश दिए थे
हालांकि, पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा के सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत होने व न्यायमूर्ति विनय सराफ के इंदौर स्थानांतरण के कारण नियमित सुनवाई बाधित हो गई। बाद में 16 और 24 जून को न्यायमूर्ति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति भगवती प्रसाद शर्मा की युगलपीठ ने प्रकरणों की सुनवाई करते हुए 13 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में नियमित सुनवाई के निर्देश दिए थे।
न्यायमूर्ति आनंद पाठक के साथ विशेष बेंच में नामित किया गया है
चूंकि न्यायमूर्ति विनय सराफ पहले से इन मामलों की सुनवाई कर चुके हैं, इसलिए न्यायिक निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासनिक आदेश जारी कर उन्हें पुनः न्यायमूर्ति आनंद पाठक के साथ विशेष बेंच में नामित किया गया है। इससे वर्षों से लंबित ओबीसी आरक्षण विवाद के शीघ्र अंतिम निराकरण की उम्मीद बढ़ गई है।
