नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। अस्थि दिव्यांग हिमांशु सोनी ने एमपीपीएससी की तैयारी घर पर रहकर ऑनलाइन माध्यम से की। सीमित संसाधनों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।
संवेदनशील व्यवहार और सकारात्मक सोच पहचान
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि हिमांशु अपने संवेदनशील व्यवहार और सकारात्मक सोच के लिए भी पहचाने जाते हैं।
पहला दिन इस बात का संकेत था
जनसुनवाई में उनका पहला दिन इस बात का संकेत था कि वे आमजन की समस्याओं को प्राथमिकता देने वाले अधिकारी के रूप में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं।
राज्य प्रशासनिक सेवा में स्थान बनाया
कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने राज्य प्रशासनिक सेवा में स्थान बनाया। उनकी नियुक्ति उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों को अपनी सफलता की राह में बाधा मान लेते हैं।
पिता की आंखों में छलक उठा गर्व
हिमांशु सोनी के साथ उनके पिता महेंद्र सोनी भी कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। बेटे को डिप्टी कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभालते देख उनकी आंखों में खुशी साफ दिखाई दे रही थी।
परिवार के जीवन का सबसे गौरवपूर्ण क्षण
महेंद्र सोनी ने कहा, यह हमारे परिवार के जीवन का सबसे गौरवपूर्ण क्षण है। हिमांशु ने कभी अपनी शारीरिक चुनौती को कमजोरी नहीं बनने दिया।
आत्मविश्वास के दम पर उसने यह मुकाम पाया
मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर उसने यह मुकाम हासिल किया। युवाओं से मेरा यही कहना है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, लगातार प्रयास करने वालों के सपने जरूर पूरे होते हैं।
जनसुनवाई में व्हीलचेयर पर पहुंचे पहले ही दिन
- व्हीलचेयर पर बैठकर पहले ही दिन जनसुनवाई में शामिल हुए डिप्टी कलेक्टर हिमांशु सोनी।
- घर पर रहकर आनलाइन तैयारी कर एमपीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की।
- अस्थि दिव्यांग होने के बावजूद संघर्ष को बनाया सफलता की ताकत।
- कुल 124 आवेदनों पर सुनवाई, अधिकारियों को समयबद्ध निराकरण के निर्देश।
- पिता बोले- ‘बेटे ने साबित किया कि हौसले के आगे कोई चुनौती बड़ी नहीं होती।’
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