स्लीपर कोच में यात्रियों से अलग से शुल्क वसूली और बेडरोल की निगरानी को निजी एजेंसी मुश्किल मान रही है। …और पढ़ें

HighLights
- चादर, तकिया और कंबल देने की योजना अधर में
- शहर से लंबी दूरी की ट्रेनों से होनी थी शुरुआत
- लंबी दूरी की प्रमुख ट्रेनों के लिए प्रस्ताव तैयार था
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रेलवे द्वारा स्लीपर कोच के यात्रियों को भी एसी कोच जैसी बेडरोल सुविधा उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल अधर में लटक गई है।
कोई निजी एजेंसी सामने नहीं आ रही है
मुख्य वजह यह है कि जबलपुर से चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में यह सेवा संचालित करने के लिए कोई निजी एजेंसी सामने नहीं आ रही है। अभी दक्षिण रेलवे में कुछ ट्रेनों में स्लीपर कोच में बेडरोल सेवा का प्रयोग शुरू किया जा चुका है।
शुल्क यात्रा टिकट के अतिरिक्त लिया जाना था
रेलवे की योजना के अनुसार स्लीपर श्रेणी के यात्रियों को उनकी मांग पर शुल्क लेकर चादर, तकिया कवर और कंबल उपलब्ध कराया जाना था। यह शुल्क यात्रा टिकट के अतिरिक्त लिया जाना था।
इच्छुक एजेंसियों से आवेदन भी आमंत्रित किए
सेवा का संचालन निजी एजेंसियों के माध्यम से किया जाना प्रस्तावित था, जिसके लिए पश्चिम मध्य रेल ने इच्छुक एजेंसियों से आवेदन भी आमंत्रित किए थे। प्रारंभिक चरण में जबलपुर से चलने वाली लंबी दूरी की प्रमुख ट्रेनों के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था।
तय सीट उपलब्ध का भी प्रस्ताव था
जैसे वैष्णो देवी कटरा एक्सप्रेस, यशवंतपुर एक्सप्रेस और सोमनाथ सुपरफास्ट एक्सप्रेस में यह सुविधा शुरू करने की योजना थी। इसके लिए एजेंसी के कर्मचारियों को स्लीपर कोच में निर्धारित स्थान और सीट उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव तैयार किया गया था।
बेडरोल वितरण से अपेक्षित लाभ नहीं मिलने का अनुमान
निजी एजेंसियों को स्लीपर कोच में बेडरोल वितरण से अपेक्षित लाभ नहीं मिलने का अनुमान है। एसी कोच में बेडरोल का शुल्क यात्रा टिकिट के साथ शामिल होता है। चादर, कंबल चोरी की आशंका जता रही है। इसी कारण अब तक किसी एजेंसी ने इस कार्य में रुचि नहीं दिखाई है। परिणामस्वरूप रेलवे की यह यात्री सुविधा शुरू नहीं हो सकी है।
