इस सेवा के शुरू होने से शहरवासियों को न केवल आवागमन के लिए एक सुलभ, आरामदायक और किफायती साधन मिलेगा, बल्कि यह कदम जबलपुर को प्रदूषण मुक्त और स्मार्ट श…और पढ़ें

HighLights
- शेष बसें भी एक-दो दिन के भीतर आ जाएंगी
- दैनिक सफर को बेहद आसान और सुखद बनाएंगी
- सर्वोच्च गुणवत्ता के साथ पूरी की जाएं तैयारियां
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। संस्कारधानी के नागरिकों को अत्याधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल एयर कंडिशनर इलेक्ट्रिक बस में सफर करने का सपना जल्द साकार होगा। प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत पहले चरण में 40 में से 32 ई-बसें जबलपुर पहुंच चुकी है। शेष बसें भी एक-दो दिन के भीतर आ जाएंगी। ई-बसों का भव्य शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅॅ. मोहन यादव इसी अगस्त माह में करेंगे।
चार्जिंग स्टेशन एवं डिपो का गहन निरीक्षण किया
रविवार को शुभारंभ की तैयारियों को लेकर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कठौदा स्थित अत्याधुनिक ई-बस चार्जिंग स्टेशन एवं डिपो का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मंत्री राकेश सिंह ने बसों की व्यवस्थाओं, उनकी तकनीकी सुविधाओं और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नागरिकों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय सीमा के भीतर और सर्वोच्च गुणवत्ता के साथ पूरी की जाएं।
ट्रैफिक का दबाव कम होगा
कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि पीएम ई-बस सेवा शुरू होने से शहर के प्रमुख रूटों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और डीजल-पेट्रोल से होने वाले धुएं व प्रदूषण से राहत मिलेगी। पूरी तरह वातानुकूलित और आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस ये बसें आम नागरिकों के दैनिक सफर को बेहद आसान और सुखद बनाएंगी।
मौके पर मौजूद रहे यह अधिकारी
इस अवसर पर नगर निगम अध्यक्ष रिंकू विज, जेडीए अध्यक्ष संदीप जैन, कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार तथा क्षेत्रीय पार्षद मोनिका सिंह, अपर आयुक्त सौरभ मिश्रा, अधीक्षण यंत्री कमलेश श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री नवीन लोनारे, सीईओ सचिन विश्वकर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिशभी मौके पर मौजूद रहे।
इलेक्ट्रिक बसों के लिए भारत में प्रमुख बस डिपो में हैं आधुनिक चार्जिंग स्टेशन
भारत में इलेक्ट्रिक बसों के लिए जबलपुर के कठौंदा, लखनऊ के दुबग्गा, पटना आदि प्रमुख बस डिपो में आधुनिक चार्जिंग स्टेशन बनाए गए हैं। इन हाई-कैपेसिटी फास्ट चार्जिंग पॉइंट्स की क्षमता 180 से 240 किलोवाट तक होती है, जो बसों को जल्दी चार्ज करने में मदद करते हैं।
- बसें आमतौर पर रूट के बीच या रात में डिपो में खड़ी होने पर चार्ज की जाती हैं।
- हाई-कैपेसिटी चार्जर बसों को औसतन 1 से 1.5 घंटे में चार्ज करने की क्षमता रखते हैं।
- कई आधुनिक बसों और ट्रेवल लाउंज में यात्रियों के लिए फोन चार्जिंग और यूएसबी पोर्ट की सुविधा भी उपलब्ध होती है।
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