प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश कृष्णमूर्ति मिश्रा की अदालत ने अपने एक आदेश में साफ किया कि सिर्फ न्यायाधीश से न्याय न मिलने की आशंका केस ट्रांसफर का आधार …और पढ़ें

HighLights
- आरोपित ने जज पर लगाया था पूर्वाग्रह का आरोप
- बैंक खाते सील करने के आदेश को बताया आधार
- सत्र न्यायाधीश ने दिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश कृष्णमूर्ति मिश्रा की अदालत ने अपने एक आदेश में साफ किया कि सिर्फ न्यायाधीश से न्याय न मिलने की आशंका केस ट्रांसफर का आधार नहीं हो सकती। कायदे से न्याय की विफलता की युक्तियुक्त आशंका विद्यमान होनी चाहिए। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने एक आपराधिक मामले को दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की मांग नामंजूर करते हुए उसकी अर्जी निरस्त कर दी।
आरोपित ने जज पर लगाया था पूर्वाग्रह का आरोप
जबलपुर के दीक्षितपुरा के रहने वाले राजेश कुमार अवस्थी के खिलाफ पुलिस थाना माढ़ोताल में धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में चल रहा था। इसी मामले में आरोपित राजेश ने सत्र न्यायालय में एक झूठी अर्जी लगाई कि जज की पहचान शिकायतकर्ता पक्ष से है।
वह पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर आरोपित के विरुद्ध कार्रवाई कर रहे हैं। इसलिए उन्हें निष्पक्ष न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। लिहाजा, इस केस को किसी दूसरे जज के पास ट्रांसफर कर दिया जाए।
बैंक खाते सील करने के आदेश को बताया आधार
आरोपित पक्ष ने कोर्ट द्वारा बीएनएनएस की धारा 107 की कार्रवाई शुरू किए जाने को भी पूर्वाग्रह बताया। दलील दी गई कि जज ने बिना किसी आवेदन के स्वतः संज्ञान लेकर राजेश अवस्थी, उसकी बहन रश्मि अवस्थी और मां गीता अवस्थी के बैंक खाते सील करने का आदेश जारी किया था।
शिकायतकर्ता पक्ष के वकील ने दी अर्जी खारिज करने की दलील
इस पर शिकायतकर्ता पक्ष सुभाष चंद्र केसरवानी के वकील आदर्श सिंह चौहान ने तर्क दिया कि आरोपित ने सुप्रीम कोर्ट तक सिविल केस हारने के बाद भी विवादित संपत्ति अवैध रूप से बेची है। आरोपित जानबूझकर केस की कार्यवाही लटकाने के लिए यह आवेदन लेकर आया है। महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की। अतः जज बदलने की अर्जी खारिज की जानी चाहिए।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपों को बताया असत्य और आधारहीन
सत्र न्यायालय ने न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार से इस संबंध में टीप मांगी, तो उन्होंने आरोपित के सभी आरोपों को सिरे से निरस्त करते हुए इसे पूर्णतः असत्य और आधारहीन बताया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि यह आशंका कि उन्हें पीठासीन अधिकारी से न्याय प्राप्त नहीं हो पाएगा, पूर्णतः काल्पनिक एवं आधारहीन है। केवल कल्पनाओं और आशंकाओं के आधार पर केस ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।
सत्र न्यायाधीश ने दिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
सत्र न्यायाधीश मिश्र ने सुप्रीम कोर्ट के उस्मान गनी अदमभाई वहोरा बनाम गुजरात राज्य (2016) मामले का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि न्याय सिर्फ होना नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी सिर्फ मनगढ़ंत आशंका जताकर जज बदलने की मांग करने लगे।
