ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट हॉस्टल में मंगलवार को छात्र राजनीति को लेकर जमकर हंगामा हुआ।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट हॉस्टल में मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। पूरा मामला छात्र राजनीति करने वाले दो गुटों से जुड़ा हुआ था। युवा कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को तो पुलिस ने रवाना कर दिया, लेकिन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता धरना समाप्त करने को तैयार नहीं हुए तो कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य भावुक हो गए।
उन्होंने हाथ जोड़कर विद्यार्थियों से कहा- ‘मुझे माफ कर दीजिए। मैं इस संस्थान का मुखिया हूं। आपने जो भी मांगें रखी हैं, उन पर कार्रवाई का आश्वासन दिया जा चुका है। यदि इसके बाद भी आप संतुष्ट नहीं हैं तो यह मेरे लिए पीड़ादायक है।’ कुलगुरु के इस विनम्र और भावुक आग्रह का प्रदर्शनकारियों पर असर पड़ा। अभाविप पदाधिकारियों ने कुलगुरु से कहा कि उन्हें माफी मांगने की आवश्यकता नहीं है और अपने व्यवहार के लिए स्वयं खेद व्यक्त किया।
दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद के साथ गतिरोध समाप्त हुआ। हॉस्टल परिसर में आयोजित एनएसयूआई के एक कार्यक्रम को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) और एनएसयूआई कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच जमकर नारेबाजी और तीखी बहस हुई।
स्थिति तनावपूर्ण होने पर विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हस्तक्षेप करते हुए एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के नेताओं को परिसर से रवाना कर दिया। इसके बावजूद अभाविप कार्यकर्ता हास्टल के बाहर धरने पर डटे रहे। करीब रात आठ बजे कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य के भावुक हस्तक्षेप के बाद धरना समाप्त हो सका।
कुलसचिव से सहमति नहीं तो कुलगुरु को बुलाया
धरना समाप्त कराने के लिए सबसे पहले कुलसचिव राजीव मिश्रा ने प्रदर्शनकारी छात्रों से चर्चा की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य स्वयं धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने विद्यार्थियों की शिकायतें सुनीं और आश्वासन दिया कि बिना अनुमति विश्वविद्यालय परिसर में कार्यक्रम आयोजित कराने के मामले की जांच कराई जाएगी। साथ ही संबंधित पक्ष के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने और हास्टल वार्डन को कारण बताओ नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जाएगी।
कार्यक्रम की तैयारी में था एनएसयूआई
जानकारी के अनुसार, युवा कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत आर्यभट्ट हास्टल में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मितेंद्र दर्शन सिंह और एनएसयूआई के पदाधिकारी छात्रों से संवाद करने पहुंचे थे। कार्यक्रम की जानकारी मिलते ही पूर्व से छात्रों की समस्याओं को लेकर धरना दे रहे अभाविप के पदाधिकारी और कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए।
उन्होंने विश्वविद्यालय की अनुमति के बिना परिसर में राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने का विरोध करते हुए मुख्य द्वार पर एनएसयूआइ कार्यकर्ताओं से विवाद शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। मौके पर दोनों गुट जमकर विवाद कर रहे थे। छात्र नेता भी एक-दूसरे पर कई आरोप लगा रहे थे।
