हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि केवल शादी का प्रस्ताव लेकर युवती के घर जाने मात्र से भारतीय द…और पढ़ें

HighLights
- हरदा के नितेश कहार को मिली बड़ी राहत
- हाई कोर्ट ने खारिज की एक साल की सजा
- शादी के प्रस्ताव पर दर्ज हुई थी एफआईआर
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि केवल शादी का प्रस्ताव लेकर युवती के घर जाने मात्र से भारतीय दंड संहिता की धारा 354-डी (स्टाकिंग) का अपराध स्वतः सिद्ध नहीं हो जाता।
यदि अभियोजन लगातार पीछा करने के आरोप को विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित नहीं कर सके और एफआईआर दर्ज कराने में असामान्य देरी का संतोषजनक कारण भी न हो, तो दोषसिद्धि कायम नहीं रह सकती। कोर्ट ने इसी आधार पर हरदा निवासी नितेश कहार को दोषमुक्त कर दिया।
शादी के प्रस्ताव पर एफआईआर और ट्रायल कोर्ट का फैसला
अपील में बताया गया कि आरोपित 28 फरवरी, 2022 को युवती के घर शादी का प्रस्ताव लेकर गया था। इसके बाद स्वजनों के विरोध पर उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई।
ट्रायल कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट और धारा 506 के आरोपों से बरी करते हुए धारा 354-डी के तहत एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।
एफआईआर में देरी और साक्ष्यों के अभाव पर हाई कोर्ट का निर्णय
हाई कोर्ट ने पाया कि कथित पीछा करने की पहली घटना के लगभग 15 दिन बाद एफआईआर दर्ज हुई और देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। साथ ही, आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र गवाह भी नहीं था।
जिरह के दौरान पीड़िता ने यह भी स्वीकार किया कि आरोपी उससे प्रेम करता था और उसके पिता के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा था। इन परिस्थितियों में हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का निर्णय निरस्त करते हुए अपील स्वीकार कर आरोपित को दोषमुक्त कर दिया।
